




2026-05-16 15:37:14
कुशवाहा समाज की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि हम अक्सर दूसरों के आदर्शों को अपनाकर उन्हें अपना बताने लगते हैं, जबकि हमारा अपना इतिहास इतना महान है कि दुनिया ने उसे स्वीकार किया है। हम ऐसे भगवानों और महानायकों की पूजा करते हैं जिन्होंने कुशवाहा समाज के हित में न कभी शिक्षा दी, न कोई अधिकार दिलाया, बल्कि इतिहास गवाह है कि अधिकतर काम समाज के विरोध में ही हुए, फिर भी हम पूछते हैं-ऐसा क्यों?
अगर कुशवाहा समाज का इतिहास पढ़ा जाये सबसे पहले नाम आता है ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ का जिन्हें भारत का पिता कहा जाता है। एक साधारण पृष्ठभूमि से उठकर उन्होंने अखंड भारत की नींव रखी। मौर्य वंश में लगभग 10 महान शासक हुए, लेकिन उनमें सबसे शक्तिशाली सबसे प्रसिद्ध और सबसे महान सम्राट- ‘सम्राट अशोक मौर्य’। उनसे बड़ा सम्राट भारत ने न पहले देखा, न बाद में। भगवान के रूप में कुशवाहा समाज की पहचान, अगर भगवान की बात करें तो-भगवान गौतम बुद्ध कुशवाहा समाज के शाक्य वंश में जन्मे, उन्होंने कभी हथियार नहीं उठाया, हिंसा का रास्ता नहीं चुना ‘ज्ञान’, ‘करुणा’ और ‘अहिंसा’ से पूरी दुनिया को रास्ता दिखाया। आज भारत की पहचान सम्राट अशोक और भगवान बुद्ध से होती है। विदेशों में मंच मिलता है तो लोग कहते हैं- ‘मैं भगवान बुद्ध की धरती से आया हूँ’ दुनिया भारत को बुद्ध से पहचानती है। किसी और भगवान का नाम लेकर देखिये पहचान नहीं बनती। इसलिए भड़कने की नहीं पढ़ने की जरूत है। हमें भड़कने की जरूरत नहीं लड़ने की जरूरत, नहीं दूसरों के आदर्श उठाने की जरूरत नहीं। हमें अपने इतिहास को पढ़ने की जरूरत है, अपने महापुरुषों को जानने की जरूरत है। अपने भगवान और अपने सम्राटों पर गर्व करने की जरूरत है। जब समाज अपने इतिहास को पहचान लेता है, तो उसे कोई झुका नहीं सकता।





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