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03 जून 1995: बहुजन राजनीति का टर्निंग पॉइंट

जब बहन मायावती जी पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं
News

2026-06-01 15:53:21

3 जून 1995 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नए सूर्योदय जैसा था। इसी दिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी (आदरपूर्वक बहन जी) ने पहली बार देश के सबसे बड़े सूबे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। यह घटना केवल एक राजनीतिक सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि सदियों से सत्ता के गलियारों से दूर रहे शोषितों, दलितों, पिछड़ों और वंचितों (बहुजन समाज) के हाथों में देश की सबसे शक्तिशाली कुर्सी सौंपने का एक ऐतिहासिक सामाजिक इंकलाब था। वे न केवल उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं, बल्कि भारत के इतिहास में पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने देश और दुनिया की राजनीति में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। कांशीराम साहब के कुशल मार्गदर्शन और बहन मायावती जी के अदम्य साहस के बल पर बहुजन आंदोलन ने वह मुकाम हासिल किया, जिसने उत्तर प्रदेश की सामाजिक-राजनीतिक संरचना को हमेशा के लिए बदल दिया। बहन जी ने उत्तर प्रदेश में चार बार (1995, 1997, 2002 और 2007-2012) मुख्यमंत्री के रूप में शासन किया। उनके शासनकाल को आज भी सख्त कानून-व्यवस्था और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के सिद्धांतों पर आधारित विकास के स्वर्ण युग के रूप में याद किया जाता है।

1. बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर और सम्राट अशोक की सांस्कृतिक विरासत का पुनरुत्थान

आजादी के बाद दशकों तक भारत के मुख्यधारा के इतिहास और सार्वजनिक स्थलों से बहुजन समाज के महापुरुषों, संतों और गुरुओं को गायब रखा गया था। बहन मायावती जी ने सत्ता में आते ही इस सांस्कृतिक असमानता पर कड़ा प्रहार किया और तथागत गौतम बुद्ध, महान सम्राट अशोक, राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, नारायण गुरु, संत कबीर, संत रविदास और बोधिसत्व बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की विरासत को उत्तर प्रदेश की धरती पर जीवंत कर दिया।

भव्य स्मारकों और पार्कों का निर्माण

बहन जी ने लखनऊ और नोएडा में ऐसे भव्य सांस्कृतिक प्रतीकों का निर्माण कराया जो आने वाली सदियों तक बहुजन चेतना के केंद्र बने रहेंगे:

डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतीक स्थल (लखनऊ): लखनऊ के गोमती नगर में लाल बलुआ पत्थरों से बना यह भव्य स्मारक वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है। यहाँ बाबासाहेब, कांशीराम साहब और स्वयं बहन जी की विशाल प्रतिमाओं के साथ-साथ बहुजन महापुरुषों के संघर्षों को उकेरा गया है।

मान्यवर श्री कांशीराम जी ग्रीन इको गार्डन और बुद्ध विहार: लखनऊ में निर्मित यह स्थल बुद्ध के शांति संदेश और कांशीराम साहब के राजनीतिक संघर्ष को समर्पित है।

राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल और ग्रीन गार्डन (नोएडा): दिल्ली से सटे नोएडा में स्थित यह भव्य स्थल बाबासाहेब और बौद्ध विरासत को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करता है। यहाँ लगे पत्थरों के विशाल हाथी सम्राट अशोक की विरासत और बहुजन स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में खड़े हैं।

नए जिलों और जनपदों का गठन

उत्तर प्रदेश के भूगोल को बहुजन इतिहास के रंग में रंगते हुए बहन जी ने कई नए जिलों का गठन किया और उनका नामकरण शोषित समाज के नायकों के नाम पर किया:

=महामाया नगर (हाथरस), संत कबीर नगर, संत रविदास नगर (भदोही)।

=छत्रपति शाहूजी महाराज नगर (अमेठी), कांशीराम नगर (कासगंज)।

=गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), ज्योतिबाफुले नगर (अमरोहा), और पंचशील नगर (हापुड़)।

इसके अतिरिक्त उन्होंने लखनऊ में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और महान वीरांगनाओं के नाम पर कई सरकारी कॉलेजों की स्थापना की, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने गौरवशाली इतिहास को जान सकें।

गरीब, शोषित और वंचितों के लिए क्रांतिकारी योजनाएं

बहन मायावती जी का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतीकों का निर्माण नहीं था, बल्कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना था। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में ऐसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, जिन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गरीब परिवारों का जीवन बदल दिया।

अम्बेडकर ग्राम विकास योजना

यह बहन जी की सबसे महत्वाकांक्षी और सफल योजनाओं में से एक थी। इसके तहत राज्य के उन गांवों को चिह्नित किया जाता था जहाँ दलितों और पिछड़ों की आबादी अधिक थी। इन गांवों में युद्धस्तर पर विकास कार्य किए जाते थे, जिनमें:

=पक्की सड़कों और नालियों का निर्माण।

=शत-प्रतिशत विद्युतीकरण (बिजली पहुंचाना)।

=स्वच्छ पेयजल के लिए हैंडपंप लगवाना।

=प्राथमिक विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना।

इस योजना ने उत्तर प्रदेश के हजारों पिछड़े गांवों की सूरत बदल दी और ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊंचा उठाया।

महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना

इस योजना के तहत राज्य के उन अत्यंत निर्धन परिवारों की महिलाओं को सीधे नकद वित्तीय सहायता (पेंशन) दी जाती थी, जो किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ नहीं पा रहे थे। इससे ग्रामीण महिलाओं के हाथ में सीधे पैसा पहुँचा और वे आर्थिक रूप से सशक्त हुईं।

कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना

शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ियों और स्लम बस्तियों में रहने वाले भूमिहीन और अत्यंत गरीब परिवारों के लिए बहन जी ने बहुमंजिला पक्के मकानों का निर्माण कराया। इन फ्लैटों का आवंटन पूरी तरह मुफ्त और पारदर्शी तरीके से सीधे गरीब परिवारों (विशेषकर महिलाओं के नाम पर) को किया गया, जिससे लाखों लोगों को सम्मानजनक छत मिली।

सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना

बहुजन समाज की बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने यह क्रांतिकारी कदम उठाया। इसके तहत गरीब परिवारों की छात्राओं को स्कूल जाने के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ मुफ्त साइकिल वितरित की जाती थी, ताकि दूरी या पैसों की कमी के कारण बेटियों की पढ़ाई न छूटे।

कानून व्यवस्था और सर्वजन सुशासन

उत्तर प्रदेश जैसे कानून-व्यवस्था के मामले में संवेदनशील राज्य में बहन मायावती जी का शासनकाल सख्त और निष्पक्ष प्रशासन का पर्याय माना जाता है। उनके राज में अपराधी या बाहुबली चाहे किसी भी दल, जाति या रसूख का हो, जेल की सलाखों के पीछे ही नजर आता था।

अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश: बहन जी ने पुलिस प्रशासन को खुली छूट दे रखी थी कि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करें। उनके राज में महिलाओं, व्यापारियों और कमजोर वर्गों के लोग रात में भी बेखौफ होकर घूम सकते थे।

पदोन्नति और नौकरियों में आरक्षण: उन्होंने सरकारी नौकरियों में दलितों और पिछड़ों के बैकलॉग (पुरानी खाली पड़ी सीटें) को भरने के लिए विशेष अभियान चलाए। साथ ही, उन्होंने सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण लागू करने के लिए कड़ा संघर्ष किया, जिससे बहुजन अधिकारियों को उनका हक मिल सका।

किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा: किसानों की फसलों (विशेषकर गन्ना) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में ऐतिहासिक वृद्धि की गई और भूमिहीन कृषि मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी तय की गई, जिससे सामंती उत्पीड़न पर लगाम लगी। ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा और आधुनिक विकास

अक्सर आलोचक बहुजन राजनीति को केवल जातिगत चश्मे से देखते थे, लेकिन बहन जी ने 2007-2012 के अपने पूर्ण बहुमत के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश को आधुनिक बुनियादी ढांचा देकर सबको चौंका दिया।

यमुना एक्सप्रेस-वे: दिल्ली से आगरा को जोड़ने वाला यह 165 किलोमीटर लंबा, भारत का पहला सबसे आधुनिक 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे बहन मायावती जी की ही दूरगामी सोच का परिणाम था। इसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की गति को कई गुना बढ़ा दिया।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा का विकास: नोएडा को एक वैश्विक औद्योगिक और आईटी हब के रूप में स्थापित करने का श्रेय बहन जी की नीतियों को जाता है। उन्होंने वहाँ बुनियादी ढाँचे, चौड़ी सड़कों और बिजली आपूर्ति को विश्वस्तरीय बनाया।

गंगा एक्सप्रेस-वे की परिकल्पना: उन्होंने बलिया से नोएडा तक गंगा एक्सप्रेस-वे की विशाल योजना तैयार की थी, जिसे तत्कालीन विपक्षी राजनीतिक अड़चनों के कारण उस समय रोका गया, लेकिन आज की सरकारें उसी मॉडल पर काम कर रही हैं।

3 जून 1995 को जो कारवां लखनऊ के राजभवन से शुरू हुआ था, उसने भारत की सदियों पुरानी सामंती और मनुवादी मानसिकता को हिलाकर रख दिया। सुश्री मायावती जी ने यह साबित कर दिखाया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही विजन हो, तो एक साधारण परिवार से आने वाली महिला भी देश के सबसे बड़े राज्य को देश का सबसे बेहतरीन प्रशासित राज्य बना सकती है। बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से अछूतों और वंचितों को जो एक वोट, एक मूल्य का अधिकार दिया था, मान्यवर कांशीराम साहब ने उसे राजनीतिक चेतना में बदला और बहन मायावती जी ने उसे सत्तारूढ़ और शासक वर्ग के रूप में जमीन पर उतारकर दिखाया। सम्राट अशोक की धम्म विजय और बाबासाहेब के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को आधुनिक भारत की राजनीति में स्थापित करने के लिए बहन मायावती जी का नाम इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

ये सभी कार्य उनके शासन काल की कुच्छेक अद्भुत मिशालें हैं। उनका शासन काल वंचितों, शोषितों को एक रहकर सत्ता में आने के लिए सीख देता है। जब तक बहुजन समाज वैचारिक रूप में विभक्त रहेगा, तब तक ब्राह्मणवाद मजबूत होकर देश और प्रदेशों की शासन सत्ता पर मजबूती से बना रहेगा।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05