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आजादी के गुमनाम नायक डॉ. भगवानदास माहौर

(A Versatile Revolutionary & Scholar)
News

2026-03-07 15:18:05

डॉ. भगवान दास माहौर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी, उत्कृष्ट साहित्यकार और शिक्षाविद थे। वे हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (ssra) के सक्रिय सदस्य और चंद्रशेखर आजाद तथा भगत सिंह के बेहद करीबी और विश्वस्त साथी थे। देश की स्वतन्त्रता के लिए अपना सर्वस्व दाँव पर लगाने वाले डा. भगवानदास माहौर का जन्म 27 फरवरी, 1909 को ग्राम बडौनी (दतिया, मध्य प्रदेश) में हआ था। माता नन्नीबाई लाड़-प्यार लुटातीं पशु-पक्षियों एवं प्रकृति से जुड़ी कहानियां सुनातीं, फलत: बालक भगवान दास प्रकृति के सान्निध्य में शांति एवं सुख अनुभव करते प्रकृति से भावनात्मक रूप से जुड़ता गया। पिता रामचरन माहौर का मिठाई बनाने का व्यवसाय था, किंतु वह जीवन में शिक्षा के महत्व से परिचित थे। इसी कारण पढ़ाई की उम्र होते ही बालक को गांव के विद्यालय में भेजा जाने लगा और समय के साथ उसने पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली। आगे की शिक्षा हेतु गांव में विद्यालय उपलब्ध न था तो भगवान दास को कक्षा 6 में प्रवेश हेतु झांसी में रिश्तेदार नाथूराम माहौर के पास भेज दिया गया और वह मन लगाकर पढ़ने लगे। कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने आजाद की सलाह पर ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में प्रवेश ले लिया और छात्रावास में रहने लगे; पर जब वहाँ आने वाले क्रान्तिकारियों की संख्या बहुत बढ़ने लगी, तो उन्होंने ‘चन्द्रबदनी का नाका’ मोहल्ले में एक कमरा किराये पर ले लिया।

साहस के धनी थे भगवान दास:

किशोरावस्था में ही उनके भीतर देशभक्ति का जज्बा पैदा हो गया था। जब वे 9वीं कक्षा में थे, तब शचींद्रनाथ बख्शी के जरिए उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से हुई। आजाद के प्रभाव में आकर वे पूरी तरह से क्रांतिकारी आंदोलन में कूद पड़े थे। शचींद्रनाथ ने भगवान दास को चंद्रशेखर आजाद से मिलवाया। उम्र रही होगी 15-16 वर्ष, आजाद ने परीक्षा ली। शचींद्रनाथ ने पिस्तौल में गोली भरकर नली भगवान दास की ओर करके ट्रिगर दबाते हुए कहा कि गोली ऐसे चलाते हैं। इसी बीच आजाद ने शचींद्रनाथ का हाथ ऊपर उठा दिया, गोली छत से जा टकराई और छत का थोड़ा चूरा फर्श पर फैल गया। आजाद ने भगवान दास की नब्ज टटोली, दिल की धड़कन सुनी, सब सामान्य जैसे कुछ हुआ ही न हो। साहस के धनी भगवान दास न केवल क्रांतिकारी दल में शामिल कर लिए गये, बल्कि आजाद के घनिष्ठ और प्रिय साथी भी बन गये। चंद्रशेखर आजाद का आगमन जब भी झांसी होता तो भगवान दास के साथ ही रहते। झांसी के ही दो क्रांतिकारी साथी सदाशिव मलकापुर एवं विश्वनाथ वैशम्पायन, जो बांदा में बहुत समय रहे और पढ़ाई की, भी मिलते। बारहवीं उत्तीर्ण कर आजाद के निर्देश पर भगवान दास ने 1928 में विक्टोरिया कालेज ग्वालियर में प्रवेश लेकर छात्रावास में रहने लगे। यहां क्रांतिकारी साथियों का बहुत आना-जाना लगा रहता था, किसी को शक न हो जाये, यह सोच कर भगवान दास ने छात्रावास छोड़कर बाहर शहर में एक मकान किराये पर लिया। यहां पर क्रांतिकारियों का छिपना-रहना आसान हो गया।

काल चक्र का पहिया चलता रहा। लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठियों की मार से लाला लाजपत राय का बलिदान हो चुका था। बदला लेने और देश में उत्साह जगाने के लिए लाठी चार्ज का आदेश देने वाले अंग्रेज अधिकारी जेम्स अलेक्जेंडर स्काट का वध आवश्यक था। चंद्रशेखर आजाद ने भगवान दास को लाहौर बुला लिया। योजना बनी, भूलवश स्काट की जगह जॉन पायंट्ज साण्डर्स की हत्या हो गयी। पर विषय यह नहीं है कि किसकी हत्या हुई, विषय यह है कि भगवान दास की जिम्मेदारी थी कि यदि भगतसिंह और शिवराम राजगुरु से कोई चूक होती है तो विकल्प के तौर पर भगवान दास माहौर अंग्रेज अधिकारी को तुरंत गोली मार देंगे, साथ ही भगत सिंह और राजगुरु को कवर फायर भी देंगे। इस घटना के बाद कुछ क्रांतिकारी ग्वालियर आ गये। भगवान दास ने सभी को विभिन्न स्थानों पर छिपा दिया। क्रांति कभी भी लुक-छिपकर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से नहीं होती। अत: आजाद के निर्देश पर भगवान दास माहौर और शिवदास मलकापुर 1930 में बम-बारूद और हथियारों की पेटी लेकर शिवराम राजगुरु के पास अकोला के लिए निकले किंतु जयगोपाल एवं फणींद्रनाथ घोष की मुखबिरी से भुसावल में पकड़ लिए गये। जलगांव में मुकदमा चला और भगवान दास माहौर को 14 साल की जेल सजा हुई। इस मुकदमें के दौरान पहचान के लिए दोनों मुखबिर जलगाव कोर्ट में गवाही देने आने वाले थे। चंद्रशेखर आजाद ने सदाशिव मलकापुर के भाई शंकर राव के हाथ 20 फरवरी को भोजन पात्र में एक भरी पिस्तौल भगवान दास को भेज कर दोनों मुखबिरों की हत्या का निर्देश दिया। 21 फरवरी को पेशी थी, न्यायालय के बाहर भोजन करते मुखबिरों पर भगवान दास ने गोली चलाई किंतु सुरक्षाकर्मी आगे आ गया, दोनों मुखबिर मेज के नीचे छिप गये, पर अगली दो गोलियों ने दोनों को घायल कर दिया था। भगवान दास को जेल में बंद कर कठोर यातना दी गई। वर्ष 1938 में जब कांग्रेस मंत्रिमंडल बना तब आठ साल की जेल के बाद भगवान दास को रिहा किया गया, किंतु आंदोलनों में सक्रियता के कारण वह 1940 में फिर जेल में बंद कर दिये गये।

वर्ष 1945 में जेल से छूटने के बाद भगवान दास ने बीए, एमए करके आगरा विश्वविद्यालय से ‘1857 के स्वाधीनता संग्राम का हिंदी साहित्य पर प्रभाव’ विषय पर शोध कर पीएचडी उपाधि प्राप्त की और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में अध्यापन कार्य किया। वह कलम के धनी थे, साहित्य के आंगन में विचरण करते थे। क्रांतिकारियों के जीवन पर ‘यश की धरोहर’ तथा कहानी संग्रह ‘यक्ष प्रश्न’ लिख साहित्य भंडार को समृद्ध किया। एक रेडियो रूपक भी लिखा-ऐसे तो घर नहीं बनता मम्मी, जो बहुत चर्चित और लोकप्रिय हुआ। संगठन गढ़ने में कुशल, अचूक निशानेबाज एवं क्रांतिकारियों में ‘कुठे गुंतला’ नाम से सम्बोधित क्रांतिवीर डॉ. भगवान दास माहौर की इच्छा गीत गाते हुए फाँसी का फन्दा चूमने की थी; पर यह पूरी नहीं हो पायी। 12 मार्च, 1979 को लखनऊ में उनका देहान्त हुआ।। उनकी एक काव्य पंक्ति-मेरे शोणित की लाली से कुछ तो लाल धरा होगी, से श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। जन्मभूमि बड़ौनी गांव में भगवान दास माहौर की प्रतिमा देशभक्ति का संचार करती रहेगी।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05