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मोदी संघी शासन पड़ रहा देश की जनता पर भारी

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2026-09-12 12:58:32

मोदी जब 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने थे, उस समय उन्होंने पेट्रोल-डीजल के घटते हुए रेट को लेकर संघियों की मानसिकता के अनुरूप अपने आपको भाग्यशाली बताते हुए कहा था कि मैं भाग्यशाली हूँ इसलिए देश में पेट्रोल-डीजल के दाम घट रहे है। उस वक्त देश में पेट्रोल 58 रुपये और डीजल 48 रुपए प्रति लीटर था। वर्तमान समय में मोदी संघी शासन है जिसमें पेट्रोल 110 और डीजल 96 रुपए प्रति लीटर है। संघी मोदी का यह बयान उनके चरित्र के अनुरूप बेशर्मी भरा, बड़बोलेपन का नगण्य उदाहरण था। डीजल पेट्रोल के दाम घटने का कारण उस समय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार घट रही थी। उसी के अनुरूप पेट्रोल-डीजल के दाम भी घट रहे थे। इस कार्य में मोदी का कोई हाथ व नीति नहीं थी। मोदी-संघी सरकार को देश में करीब 12 साल हो गए हैं। देश के कई राज्यों में और दिल्ली समेत वहाँ डबल इंजन की संघी सरकारें हैं। संघ और मोदी ने दिल्ली में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री इसलिए बनाया था क्योंकि रेखा गुप्ता की पृष्टभूमि संघी और मनुवादी है। इसके अलावा उनमें कोई और योग्यता नहीं है जिसके बल पर उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री बनाया जाता।

जनता के लिए काल साबित हो रहा रेखा गुप्ता शासन: देश की जनता भलीभाँति जानती है कि जबसे मोदी के संघी साथी देश की शासन सत्ता में है तभी से उनका शासनकाल भोली-भाली जनता के लिए ‘काल’ बन रहा है। मोदी संघियों के कारनामे इतने ज्यादा है कि उन्हें यहाँ गिनाना और लिखा जाना भी संभव नहीं है। इसलिए यहाँ पर हम देश की राजधानी दिल्ली में घटित हुई कुछेक जघन्य घटनाओं को जनता के सामने रख रहे हैं, ताकि जनता खुद सोच सके कि मोदी अब देश के लिए शुभ है या अशुभ। साधारण आंकलन के अनुसार मोदी संघियों का शासन काल देश की जनता के लिए बेहद अशुभ ही सिद्ध हो रहा है।

=3 जून 2026 को मालवीय नगर, हौजरानी में चल रहे एक अमान्य होटल में अग्नि कांड के दौरान 23 मौतें हुई। फ्लोरी स्टे-लेमन ग्रीन हाऊस की पाँच मंजिला इमारत में भीषण आग लगी जिसमें एक ही परिवार के 8 सदस्यों और कई विदेशी नागरिकों की जान चली गई थी।

=जुलाई 2025 को उत्तर पूर्वी जिला दिल्ली के वेलकल इलाके में एक चार मंजिला पुरानी आवासीय इमारत भरभराकर अचानक गिर गई, जिसमें दबकर 6 लोगों की जान चली गई।

=6 सितम्बर 2026 को साऊथ वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही पाँच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। अवैध निर्माण और असुरक्षित नवीनीकरण के चलते यह हादसा हुआ जिसमें 7 लोगों की मौत हुई।

=दिल्ली की फायर सार्विस के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 से अब तक आग के लिहाज से यह सबसे घातक महीना रहा, जिसमें अलग-अलग घटनाओं में 15 लोगों की जाने गई। रेखा की डबल या ट्रिपल इंजन की सरकार बताए कि जिम्मेदार कौन?

=करोल बाग/चाँदनी चौक 2025 में दो पुरानी व्यवसायिक व रिहायशी इमारतों में आग लगी जिसके कारण 3 मौतें हुई। ये घटनाएँ दिल्ली सरकार में बैठाये गए घूसखोरों व घूस के घन पर ऐशो-आराम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों के लालच में हुई।

=बवाना/नारायणा औद्योगिक क्षेत्र 2025-26, दो निमार्णाधीन गोदाम/ फैक्टरी शेड के गिरने से 4 मजदूरों की मौते हुए। जिम्मेदार कौन?

गड्ढो, खुले नालों, मेन हॉल आदि में गिरने से मौते: सड़कों पर बने गड्ढों, जल भराव के दौरान खुले पड़े सीवर, मेनहॉल और निर्माण कार्यों के दौरान बने गड्ढों को लेकर दिल्ली विधान सभा और नगर निगम में सवाल पूछे गए, लेकिन दोनों ही संघी संस्थाओं ने इन घटनाओं का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। शायद सरकार यह मान चुकी है कि चाहे जनता कुछ भी सवाल उठाए या पूछे उसका जवाब मत दो और आँख मूंदकर अवैध धन इकट्ठा करते रहो। साथ में रेहड़ी-पटरी वालों को भी खुलकर लूटते रहो। दिल्ली में मार्च-जून 2026 तक खुले नाले, बिना सुरक्षा बेरीकेडिंग वाले जल बोर्ड के गड्ढों और सड़क पर बने जानलेवा गड्ढों के कारण 12 लोगों की मौते हुई। रेखा जी बताओ जिम्मेदार कौन?

गाजीपुर नाला हादसा: भारी बारिश और जलभराव के दौरान सड़क और नाले का अंतर न दिखने का कारण एक महिला और उसका बच्चा गहरे नाले में समा गए। जिसकी कोई भी जिम्मेदारी सरकार में बैठे नेता/अधिकारियों व कर्मचारियों ने नहीं ली।

रोहिणी व आउटर दिल्ली: सीवर पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदे गए बिना चेतावनी बोर्ड वाले गड्ढों में गिरने से दो पहिया वाहन चालकों की जान चली गई। रेखा गुप्ता की सरकार ने ऐसी घटनाओं पर कोई संज्ञान ही नहीं लिया, वे और उसके संघी साथी सिर्फ लीपापोती करते रहे। अब जनता पूछ रही है कि जिम्मेदार कौन?

सड़क गड्ढों से हुए हादसे: दिल्ली ट्रेफिक पुलिस के अनुसार सड़कों के गड्ढों से असंतुलित होकर गिरने या बचने के चक्कर में हुए सड़क हादसों में 2025-26 के दौरान 30 से अधिक दो पहिया सवारों और साइकिल चालकों की मौते दर्ज की गई है।

जिम्मेदार किसकी? 10 नवंबर 2025 की रात में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार में भीषण विस्फोट हुआ जिसमें कम से कम 8 से अधिक लोगों की मौते हुई। डबल इंजन की दिल्ली सरकार देश की जनता को बताए कि आपकी सरकार की अकर्मण्यता के कारण लोगों की जान जा रही है आपकी नींद कब खुलेगी।

3 सितम्बर 2026 तुर्कमान गेट, तुगलकाबाद एक्सटेंशन में आग की घटना: आग लगने के कारण 3 लोगों की मृत्यु हो गई और उनके माल का भी नुकसान हुआ।

दिल्ली के अपराधिक आंकड़े: दिल्ली पुलिस द्वारा जारी वार्षिक अपराध समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार 2025 के दौरान हत्या और बलात्कार के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज हुई है।

बलात्कार: बलात्कार के मामलों में रेखा गुप्ता की सरकार आने से पहले 2024 में 2076 मामले थे, रेखा गुप्ता की सरकार आने के बाद 1901 मामले (97.3 प्रतिशत)।

2024-25 चर्चा में रही प्रमुख घटनाएँ:

गैंगवार और टारगेट किलिंग: आउटर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली और रोहिणी इलाकों में अंतर्राष्ट्रीय गैंगों (जैसे गोगी, बंबीहा और लॉरेस बिश्नोई सिंडिकेट से जुड़े स्थानीय शूटरो) के बीच वर्चस्व को लेकर हत्याएं और फायरिंग की घटनाएँ हुई, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए, जिम्मेदार कौन?

नाबालिकों से जुड़े अपराध (पोक्सो): कुल बलात्कार मामलों में लगभग 40-45 प्रतिशत मामले पोक्सो एक्ट क तहत दर्ज हुए, जिनमें स्कूल, ट्यूशन या पड़ोस में नाबालिकों के यौन शोषण की घटनाएँ शामिल रही। लेकिन क्यों?

आपसी विवाद और रोड रेज में हत्याएं: दर्ज हुई 491 हत्याओं में सबसे बड़ा अनुपात (लगभग 42 प्रतिशत) अचानक हुए झगड़े, रोड रेज और संपत्ति विवादों से जुड़ा रहा।

जंतर-मंतर पर जेन-जी छात्र आंदोलन में भाजपा संघियों की पोल खुल गई: इस आंदोलन के दौरान जो छात्र-छात्राओ को हिरासत में लिया गया, उनकी संख्या लगभग 2800 से 3000 थी और हिरासत में लिए गए पुलिस ने सभी छात्र-छात्राओं को अपराधित कृत्यों में लिप्त बताया था। लेकिन जब पुलिस से पूछा गया कि आप कैसे कह सकते हैं कि ये सभी अपराधिक प्रवृति के है? पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में बताया था कि हमने इन सभी छात्रों को फेस रिकोज्निकेशन के माध्यम से पहचाना है और उनके द्वारा पूर्व में किए गए कृत्यों के द्वारा उन्हें अपराधी बताया गया। लेकिन दिल्ली पुलिस की पोल तब खुली जब हिरासत में लिए गए कई लोग पहले से ही दिल्ली की अलग-अलग जेलों में बंद पाये गये। तब सवाल उठा कि जब ये पहले से ही जेलों में बंद थे तो वे आंदोलन में कैसे पहुंचे? इसी सवाल ने दिल्ली पुलिस के पूरे सिस्टम की पोल खोल दी और सभी छात्र-छात्राओं को रिहा करना पड़ा। दिल्ली पुलिस को संविधान के दायरे में रहकर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए और उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनका कार्य जनता को सुरक्षा और न्याय प्रदान करना है न कि किसी राजनीतिक दबाव में जनता के साथ पक्षपात करना है।

केंद्र और दिल्ली सरकार जनता के साथ कर रही असंवैधानिक व्यवहार: देश की जनता को सरकार के संज्ञान में लाने के लिए आंदोलन करना असंवैधानिक नहीं है। बल्कि आंदोलन करना जनता का संवैधानिक अधिकार है। ताकि सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देकर उन्हें संविधान सम्मत हल करने की कोशिश करें। लेकिन वर्तमान मोदी संघी सरकार ऐसा न करके अपनी सरकार के अधीन प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के द्वारा जनता को भयभीत करके उनके मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है। लोकतंत्र में ऐसा नहीं चलता जैसा मोदी संघी सरकारें चाहती है। यहाँ पर यह भी सत्य है कि मनुवादी संघी सरकारों ने ना कभी संविधान को अपनाया और ना तिरंगे को अपनाया। संघी मानसिकता की सरकारें कभी भी राष्ट्रहित और राष्ट्र प्रेमी नहीं रही। बनावटी तौर पर वे सभी अपने आपको राष्ट्रवादी कहते हैं। मोदी-संघी सरकार पूर्ण रूप से अलोकतांत्रिक है, संविधान में विश्वास नहीं रखती, देश के अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हर रोज, हर समय जहर उगलती रहती है। संविधान में जो नागरिकों के लिए मूल अधिकार और अल्पसंख्यकों के लिए जो अधिकार दिये गए हैं उनका हर रोज बड़े पैमाने पर उल्लंघन हो रहा है। देश के प्रधानमंत्री मोदी, उनका मंत्रीमण्डल और देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु जी यह सब कुछ अपनी खुली आँखों से देखकर भी मूक दर्शक बनी रहती है। उनकी इस तरह की मुद्रा को देखकर लगता है कि देश के गुंडों को भाजपा-मनुवादियों का खुला समर्थन है।

वर्तमान मनुवादी संघी सरकार से देश की जनता त्रस्त है। देश की आबादी में सभी धर्मों, संप्रदायों और जातीय घटकों के लोग हैं। परंतु मनुवादी मोदी संघी मानसिकता के लोग हमेशा हिन्दू राष्ट्र की बात करते हैं, सामाजिक विघटन में उनकी पूरी आस्था है और उसी के लिए वे अपने आनुसंगिक संगठनों के द्वारा अनवरत प्रयास भी जारी रखते हैं। सभी संघियों का प्रयास है कि समाज को मनुस्मृति के अनुसार पर बांटा जाये और मनुस्मृति के प्रावधानों को ही संविधान माना जाए। परंतु उन्हें यह आभास नहीं है कि अब मनुवादी संघियों के पुराने अत्याचारी दिन अब लौटने वाले नहीं है। चूंकि वर्तमान जनता अपेक्षाकृत जागरूक है, संघियों को समझने की अच्छी समझ रखती है। इसलिए उनके लिए भी और देश के लिए भी अच्छा यही होगा कि देश में संविधान के प्रावधानों को अपने मन और मस्तिष्क में समाहित करके उसके अनुसार आचरण करें। अपने षडयंत्रों को छोड़कर देश की प्रगति और समृद्धि में सहायक बने। देश की जागरूक जनता ने मनुवादी संघियों के देश विरोधी कृत्यों को बहुत नजदीक से देख लिया है, खासकर बहुजन समाज के सभी जातीय घटकों ने मनुवादी संघियों द्वारा कृत्रिम रूप से निर्मित की गई अप्राकृतिक यातनाओं को झेलकर संघियों को नजदीक से समझा है। अब ये सभी मनुवादी छलावामयी जाल में फँसने वाले नहीं है।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05