




2026-07-11 17:10:38
संवाददाता
नई दिल्ली। मानसून की पहली ही भारी बारिश ने देश की राजधानी दिल्ली को एक बार फिर से महानगर से महा-टापू में तब्दील कर दिया है। 8 और 9 जुलाई 2026 को हुई मूसलाधार बारिश ने दिल्ली के बुनियादी ढांचे, ड्रेनेज सिस्टम और प्रशासनिक तैयारियों के उन तमाम दावों को पूरी तरह से बहा दिया है, जो महीनों से बड़े-बड़े विज्ञापनों और बयानों के जरिए किए जा रहे थे। इस बार दिल्ली की जनता बेहद गुस्से में है, क्योंकि इस तबाही के समय दिल्ली में सत्ता का वह ढांचा मौजूद है जिसे राजनीतिक गलियारों में चार इंजन की सरकार कहा जा रहा था—यानी केंद्र सरकार (पीएम, मोदी), दिल्ली राज्य सरकार (मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और उपराज्यपाल (एलजी) कार्यालय। इन चारों मोर्चों पर एक ही राजनीतिक दल (भाजपा) के नियंत्रण या प्रभाव होने के बावजूद, समन्वय की ऐसी ऐतिहासिक विफलता देखी गई जिसने दिल्ली को घुटनों पर ला दिया। सड़कों पर तैरती कारें, जलमग्न होते वीआईपी इलाके, उखड़ते पेड़, जमींदोज होते मकान और इन सबके बीच अपनों को खोते दिल्लीवासियों की चीखें—यह किसी सुदूर पिछड़े गांव की नहीं, बल्कि देश की सबसे हाई-टेक राजधानी की हकीकत है।
इस बार दिल्ली की जनता को उम्मीद थी कि सरकारें आपस में लड़ने के बजाय काम करेंगी। दिल्ली में लंबे समय से यह राजनीतिक बहाना बनाया जाता था कि काम इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि राज्य में दूसरी पार्टी है और केंद्र व एमसीडी में दूसरी। लेकिन वर्तमान प्रशासनिक ढांचे में यह बहाना पूरी तरह खत्म हो चुका है। वर्तमान में दिल्ली का शासन तंत्र चार इंजन के सहारे चल रहा है:
प्रथम इंजन: केंद्र सरकार (जो दिल्ली के विकास के लिए बजट और नीतियां तय करती है)।
द्वितीय इंजन: उपराज्यपाल (एलजी) कार्यालय (जिनके पास दिल्ली की जमीन, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का पूरा नियंत्रण है)।
तृतीय इंजन: दिल्ली राज्य सरकार (मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोक निर्माण विभाग - पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह)।
चतुर्थ इंजन: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) (जिसके पास गलियों के छोटे नालों की और साफ-सफाई का जिम्मा है)।
जब केंद्र से लेकर राज्य सरकार, एलजी और नगर निगम तक—हर महत्वपूर्ण चाबी एक ही राजनीतिक विचारधारा और दल के पास है, तो फिर दिल्ली की सड़कों पर यह तबाही क्यों मची? समन्वय की कमी का ठीकरा अब किस पर फोड़ा जाएगा? जब किसी राज्य में पूर्ण सत्ता एक ही दल के पास होती है, तो विफलता की पूरी और अंतिम जिम्मेदारी भी उसी तंत्र की होती है। मंत्री परवेश साहिब सिंह ने पीडब्ल्यूडी कंट्रोल रूम का दौरा करके दावा किया कि मिंटो ब्रिज जैसे 45 संवेदनशील स्थानों पर पानी नहीं भरा। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली सिर्फ मिंटो ब्रिज तक सीमित है? विकास मार्ग, संगम विहार और गाजीपुर मंडी की जनता की सुध लेने वाला कोई क्यों नहीं था?
ड्रेनेज मास्टर प्लान का फ्लॉप शो और कागजी सफाई
हर साल अप्रैल और मई के महीने में दिल्ली नगर निगम और पीडब्ल्यूडी कागजों पर दावा करते हैं कि उन्होंने दिल्ली के सभी छोटे-बड़े नालों की 100% सफाई कर दी है। इसके लिए करोड़ों रुपये के टेंडर जारी किए जाते हैं। लेकिन जुलाई की पहली ही बारिश इन दावों की हकीकत बयां कर देती है। दिल्ली में स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (बारिश का पानी निकालने वाले नाले) और सॉलिड वेस्ट सीवर (घरेलू गंदगी वाले नाले) आपस में जुड़े हुए हैं। इसके कारण नालों में प्लास्टिक, गाद और कचरा जमा हो जाता है। दिल्ली के प्राकृतिक जल निकायों और बड़े नालों पर अवैध निर्माण और बस्तियां बसा दी गई हैं, जिससे पानी के प्राकृतिक बहाव का रास्ता बंद हो गया है। संगम विहार जैसे इलाकों में पानी निकालने का कोई प्राकृतिक ढलान ही नहीं बचा है। दिल्ली की जनता अब खोखले वादों, राजनीतिक पैंतरेबाजी और मल्टी-इंजन सरकारों के दावों से थक चुकी है। टैक्स देने के बावजूद अगर देश के नागरिकों को अपनी गाड़ियों को डूबते देखना पड़े, अपने घरों में सीवर का पानी साफ करना पड़े और जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण अपनी जान गंवानी पड़े, तो यह शासन तंत्र पर सबसे बड़ा कलंक है। दिल्ली की वर्तमान भाजपा सरकार, जिसके पास केंद्र, राज्य, एमसीडी और उपराज्यपाल के रूप में असीमित प्रशासनिक शक्तियां और संसाधन मौजूद हैं, उसे इस ऐतिहासिक विफलता की सीधी जिम्मेदारी लेनी होगी। दिल्ली को लंदन और पेरिस बनाने के कागजी विज्ञापनों से बाहर निकलकर धरातल पर ड्रेनेज सिस्टम को सुधारना होगा, नहीं तो आने वाले दिनों में मानसून की अगली बौछारें दिल्ली को पूरी तरह ले डूबेंगी। जनता देख रही है, और इस बार जवाबदेही तय होना तय है।
झूठे दावों की खुली पोल
दिल्ली की संघी सरकार बहुत दिनों से अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर अपना ढ़ोल पीट रही थी कि दिल्ली के नालों और नालियों का युद्ध स्तर पर सफाई कार्य चल रहा है और अब बारिश होने पर जल भराव की कहीं पर भी समस्या नहीं आएगी। परंतु पहली की बारिश होने पर रेखा गुप्ता की सरकार के झूठे वायदों की पोल खुल गई। दिल्ली में एक भी सड़क ऐसी नहीं मिली जिस पर जल भराव की समस्या नहीं आयी हो। उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र का बहुजन स्वाभिमान संघ की टीम ने घूम-घूमकर जलभराव का जायजा लिया जहां सभी सड़के नालियाँ और नाले जल भराव के कारण बद-हाल दिखे। मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो के नीचे घुटने तक पानी भरा हुआ था। यात्री न स्टेशन के अंदर जा पा रहे थे और न न स्टेशन के बाहर आ पा रहे थे। रिक्शा, बैटरी रिक्शा, आॅटो भी सड़कों से नदारद थे, अगर कोई आॅटो रिक्शा आदि मिल भी रहा था तो वह भी यात्री से मनमाने पैसे लेकर ही तैयार हो रहा था। दिल्ली की जनता विशेष रूप से दिल्ली की मुख्यमंत्री और संबन्धित विभाग के मंत्री से यह जानना चाहती है कि आप जो पिछले एक साल से जोर-जोर से नारे लगा रहे थे कि नालों की सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है वह अब जमीन पर क्यों नहीं नजर आ रहा है वह जनता को साफ शब्दों में बताया जाये।
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने हाल ही में मंडोली चुंगी (दिल्ली) फ्लाईओवर का उद्घाटन किया है जो मंडोली चुंगी से हर्ष विहार यूपी बॉर्डर तक बना हुआ है। इस फ्लाईओवर के दोनों ओर कई बार मामूली बारिश के दौरान भी जल भराव की घटना हुई है। जिसे बहुजन स्वाभिमान समाचार पत्र में छापा और जल भराव की घटना को जनता के मुद्दे के रूप में उठाया। जिसकी कुछ प्रतियाँ दिल्ली सरकार के कार्यालय में भी भेजी गई थी। ताकि दिल्ली सरकार जल भराव की ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्यवाही करे। परंतु हालिया बारिश ने दिल्ली सरकार की पूरी पोल खोल दी है। जनता जान चुकी है, दिल्ली की संघी सरकार सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करके डिंगे हांकती है। काम नहीं करती, वह सिर्फ गरीबों के आशियाने उजाड़ सकती है, उनके घरों पर बुलडोजर चला सकती है, समाज में नफरत फैला सकती है। हिन्दू-मुसलमान के नाम पर राजनैतिक लाभ के लिए देश की जनता को बाँट सकती है।
जलभराव की समस्या जुड़ी है सरकार के भ्रष्टाचार से: जलभराव की समस्या का संबंध भ्रष्टाचार से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जिन एजेंसियों को ठेके के माध्यम से नालों की सफाई का काम दिया जाता है वे अधिकांशतया संघियों से ही जुड़े लोग है। जिसे देखकर यह कहावत चरित्रार्थ होती है कि ‘अंधा बांटे रेवड़ियाँ अपने-अपने को दे’ इसी तर्ज पर श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार दिल्ली में काम कर रही है। दिल्ली में जितने भी ठेके आबंटित किए जा रहे हैं अधिकांशतया वे सभी संघी मानसिकता के ब्राह्मण-वैश्यों और अन्य सवर्ण जातियों को दिये जा रहे हैं। इस तरह के ठेके आबंटन में दलित-पिछड़ो व अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोग नदारद है। सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि संघी मानसिकता के लोगों को ठेका देने से भ्रष्टाचार की सत्यता बाहर जनता में नहीं उजागर होती, जिससे संघी सरकार बदनाम होने से बची रहे। संघी मानसिकता के लोग भ्रष्टाचार करने में सर्वोपरि है लेकिन वे उसे छिपाकर ही रखना चाहते हैं चूंकि उनकी रणनीति हमेशा से ही छिपकर काम करने की रही है।
सड़कों में गड्ढों की भरमार: दिल्ली में जब से श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार आई है तभी से संघी मानसिकता के लोगों ने विकास के नाम पर दिल्ली में जगह-जगह धूल और गड्ढों की भरमार लगा दी है, जिसके कारण गड्ढों में गिरकर दर्जनों मौतें हो चुकी है। दिल्ली की पहली बारिश ने उन सभी गड्ढों को उनकी दिखावटी मरम्मत के बाद फिर से बड़े गड्ढों में परिवर्तित कर दिया है जिसके कारण बड़े हादसे होने की संभावना बढ़ गई है। विभाग के संबन्धित अधिकारी और कर्मचारी क्या कर रहे हैं? उनकी नजरें अपने कामों पर है या नहीं, देखकर लगता है कि उनकी नजरें अपने काम पर कम और सरकार से जुड़े मंत्री और विधायकों के आव भगत में अधिक दिखाई दे रही है। जिसे देखकर लगता है कि दिल्ली की सरकार में भ्रष्टाचार खुले स्तर पर चल रहा है। संघी मानसिकता के सरकार से जुड़े अंधभक्त इस तरह की घटनाओं पर लीपा-पोती कर जनता से छिपाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। परंतु यह जनता है जो सब कुछ जानती है और सही वक्त पर इसका सही जवाब देगी।
दिल्ली में आगजनी की घटनाएँ: दिल्ली में जब से श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार आई है तब से करीब-करीब हर रोज आगजनी की घटनाएँ समाचार पत्रों के माध्यम से जनता के संज्ञान आ रही है, जिन्हें देखकर लगता है कि अचानक आगजनी की घटनाएँ क्यों और कैसे हो रही है? संबन्धित विभाग और अधिकारी इस संबंध में क्या कर रहे हैं, इन घटनाओं का देखकर दिल्ली की जनता के मन में एक डरावना सा सपना है। हाल ही में मालवीय नगर में आगजनी की घटना को देखकर दिल्ली की जनता का दिल दहल गया। संघी मानसिकता के प्रधानमंत्री मोदी ऐसी गंभीर और दर्द भरी घटनाओं को देखकर चुप्पी साध लेते हैं। वे एक भी सांत्वना भरा शब्द मरने वाले परिवार के परिजनों के लिए नहीं बोलते, शायद संघी मानसिकता के लोगों की यही रणनीति है, मोदी जी सोचते हैं अगर कोई मारता है तो मेरा क्या? मेरा इससे क्या लेना-देना? और ऐसी घटनाएं होने के बाद वे विदेशी यात्राओं पर निकल जाते हैं। देश की जनता खुद सोचे कि क्या देश को ऐसे असंवेदनशील प्रधानमंत्री की जरूरत है?
जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप क्या खरी उतर रही दिल्ली सरकार? बिलकुल नहीं- श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार दिल्ली की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप खरी नहीं उतर रही है। महंगाई चरम पर है, शिक्षा और स्वस्थ्य के क्षेत्र में बदहाली है। दिल्ली में हाल ही में लगभग 650 करोड़ रुपये का एक बड़ा स्वास्थ्य और दवा खरीद घोटाला सामने आया है। इस मामले में दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और अन्य जरूरी सामानों की खरीद में भारी वित्तीय अनियमितताएं और कमीशनखोरी के आरोप लगे हैं। इस घोटाले की जांच एंटी करप्शन ब्रांच कर रही है। अब सवाल यह है कि संघी सरकार और उससे जुड़े उसके अंधभक्त यह बताए कि यह घोटाला कैसे और क्यों हुआ? अब संघी अंधभक्त चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? चुप्पी साधने के पीछे का मंतव्य जनता को नजर आ रहा है कि इस घोटाले में बड़े पैमाने पर संघी मानसिकता के ही लोग लिप्त है। फार्मा कंपनियों से जुड़े, सैक्टर से मोदी संघी सरकार ने चुनावी चंदे के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए का चंदा लिया था शायद अब उसी घाटे की पूर्ति कराने के लिए संघियों द्वारा यह दवाई घोटाला कराया जा रहा है। सरकारी डिस्पेन्सरियों, अस्पतालों आदि में नकली दवाईयों की भरमार है और सरकार का जोर है कि दवाईयां सिर्फ आयुष्मान केन्द्रों से ही खरीदी जाएँ जबकि जनता को देखने में आया कि इन एजेंसियों से खरीदी गई दवाईयां गुणवत्ता वाली नहीं बल्कि नकली होती है। शायद राज्य और केंद्र सरकार इस मध्यम से चुनावी चंदा जो बड़ी मात्रा में लिया था उसकी भरपाई करा रही है।





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