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असुरक्षा का पर्याय बनी देश की राजधानी ‘दिल्ली’

एनसीआरबी की रिपोर्ट ने बढ़ाई दिल्लीवालों की चिंता, लापता होने के मामलों में महिलाएं और बच्चे सबसे आगे
News

2026-05-09 17:43:32

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली, जिसे दिलवालों का शहर कहा जाता है, आज आंकड़ों के आईने में एक डरावनी तस्वीर पेश कर रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की साल 2024 की रिपोर्ट ने उन तमाम दावों की पोल खोल दी है जो दिल्ली को एक सुरक्षित वैश्विक शहर बनाने के लिए किए गए थे। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली में सुरक्षा केवल कागजी चचार्ओं और चुनावी वादों तक सीमित रह गई है।

महिलाओं के लिए खौफ का केंद्र बनी दिल्ली

एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में 19 महानगरों की सूची में शीर्ष पर है। साल भर में दर्ज किए गए 13,396 मामले न केवल एक संख्या हैं, बल्कि उस डर का प्रमाण हैं जिसे दिल्ली की हर महिला रोज महसूस करती है। महानगरों में होने वाले कुल महिला अपराधों का लगभग 25% अकेले दिल्ली में होना यह दशार्ता है कि यहाँ की व्यवस्था कितनी चरमरा चुकी है।

रेप के 1,058 मामले और अपहरण के 5,580 मामले दर्ज होना यह साबित करता है कि शहर की सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और यहाँ तक कि घरों के भीतर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यह विडंबना ही है कि जहाँ सत्ता के गलियारे हैं, वहीं आधी आबादी सबसे ज्यादा असुरक्षित है। जब देश की राजधानी में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पूरे प्रशासनिक ढांचे की नैतिक हार है।

बुजुर्गों की लाचारी और व्यवस्था की बेरुखी

दिल्ली ने एक बार फिर बुजुर्गों के लिए सबसे असुरक्षित शहर का कलंक अपने नाम किया है। साल 2024 में बुजुर्गों के खिलाफ 1,267 मामले दर्ज किए गए। हमारे समाज में बुजुर्गों को सबसे अधिक सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन दिल्ली में वे अपराधियों के आसान शिकार बन रहे हैं। अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए न तो कोई प्रभावी कम्युनिटी पुलिसिंग नजर आती है और ना ही मोहल्ला स्तर पर उनकी सुरक्षा का कोई पुख्ता तंत्र। यह केवल पुलिस की विफलता नहीं है, बल्कि उस सामाजिक और प्रशासनिक तंत्र की विफलता है जो अपने सबसे अनुभवी और कमजोर वर्ग को सुरक्षा प्रदान करने में अक्षम साबित हुआ है।

बच्चों का भविष्य और अपराध की दलदल

बच्चों के खिलाफ 7,662 अपराध दर्ज होना दिल्ली के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

बच्चों के अपहरण के मामलों में दिल्ली का आंकड़ा मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के संयुक्त आंकड़ों से भी अधिक है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दिल्ली में किशोरों (नाबालिगों) द्वारा किए गए अपराधों की दर 41.6% है, जो राष्ट्रीय औसत (7.9%) से लगभग पांच गुना ज्यादा है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर सरकार की सामाजिक नीतियों, शिक्षा प्रणाली और पुनर्वास केंद्रों की विफलता को दशार्ता है। अगर शहर के बच्चे अपराध की दुनिया में इतनी तेजी से धकेले जा रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि सरकार उन्हें सही दिशा देने और सुरक्षित वातावरण प्रदान करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

जवाबदेही का अभाव: अधिकारों की जंग में पिसती जनता

दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से एक राजनीतिक फुटबॉल बनी रही है। जब भी अपराध का कोई बड़ा मामला सामने आता है, तो दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार (जिसके अधीन दिल्ली पुलिस है) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है।

दिल्ली सरकार अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि पुलिस उनके नियंत्रण में नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव, सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता, नशामुक्ति अभियान और मोहल्लों में सुरक्षा आॅडिट करना भी सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है? सार्वजनिक स्थानों पर अंधेरा और सीसीटीवी का काम न करना अपराधियों के हौसले बुलंद करता है, और इसके लिए सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार है।

प्रशासनिक और ढांचागत खामियां

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में चोरी के 1,80,973 मामले दर्ज हुए, जो महानगरों की कुल चोरी का 30% है। यह दशार्ता है कि दिल्ली में न केवल जघन्य अपराध बढ़ रहे हैं, बल्कि सामान्य कानून-व्यवस्था का खौफ भी पूरी तरह खत्म हो चुका है।

पुलिस बल की कमी: जनसंख्या के अनुपात में पुलिसकर्मियों की संख्या आज भी बहुत कम है।

इंटेलिजेंस की कमी: स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र इतना कमजोर है कि छोटे-छोटे विवाद बड़ी वारदातों में बदल जाते हैं।

नशे का कारोबार: दिल्ली के कई इलाकों में अवैध नशे का बढ़ता कारोबार युवाओं को अपराधी बना रहा है, जिसे रोकने में प्रशासन विफल रहा है।

केवल आंकड़ों का सुधार काफी नहीं

एनसीआरबी की रिपोर्ट में कुल अपराधों में 15% की गिरावट का दावा किया गया है, लेकिन जब तक महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील वर्गों के खिलाफ अपराध कम नहीं होते, तब तक ये आंकड़े बेमानी हैं। दिल्ली पुलिस का त्वरित पंजीकरण का तर्क एक हद तक सही हो सकता है, लेकिन यह अपराध की गंभीरता और समाज में व्याप्त असुरक्षा की भावना को कम नहीं कर देता। दिल्ली को विश्व स्तरीय शहर बनाने का सपना तब तक अधूरा है, जब तक यहाँ की गलियां महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हो जातीं। सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार करना होगा जिसमें तकनीक, प्रभावी पुलिसिंग और सामाजिक जागरूकता का समावेश हो। दिल्ली अब और क्राइम कैपिटल का तमगा बर्दाश्त नहीं कर सकती। जनता को विज्ञापनों वाली चमकती दिल्ली नहीं, बल्कि सुरक्षित दिल्ली चाहिए। समय आ गया है कि जवाबदेही तय की जाए। शासन को यह समझना होगा कि सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि नागरिक का बुनियादी अधिकार है। यदि राजधानी की यही स्थिति रही, तो विकास के तमाम दावे खोखले ही साबित होंगे।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

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12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05