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दलित समाज के महापुरुषों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया

संवाददाता
News

2026-04-11 17:24:35

नई दिल्ली। दिल्ली में श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार है जो मूल रूप से संघी मनुवादी मानसिकता से संबंध रखती हैं और उसी आधार पर दिल्ली का शासन-प्रशासन चला रहीं है। दिल्ली में धर्म और विकास से जुड़े कार्यों को देखकर लगता है कि उनका पूरा सरकारी तंत्र और रवैया दलित व अत्यंत पिछड़े समुदायों से संबंध रखने वाले महापुरुषों की जन्म जयंती व स्मृति दिवस के सापेक्ष सवर्ण समाज से संबन्धित पाखंडी रीति-रिवाजों, सत्संग, कथावाचकों, कलश यात्राओं व मंदिर पर अधिक है। सीएम रेखा गुप्ता के द्वारा जनता के कर (टैक्स) से की गई सरकारी कमाई का महत्वपूर्ण हिस्सा पाखंडवादी प्रचारों व आयोजनों में खर्च किया जा रहा है। दलित समाज के महापुरुषों की जन्म जयंती और स्मृति दिवस पर नामात्र की धन राशि के आबंटन की घोषणा करके उसका ऐसे प्रचार किया जा रहा है जैसे दलित समाज के महापुरुषों के लिए संघी मानसिकता के कर्णधारों ने बहुत बड़ा योगदान किया है। यह देखकर दलित समाज की जागरूक जनता को लगता है कि श्रीमती रेखा गुप्ता की इस तरह की मानसिकता को समाज के सामने लाया जाये। रेखा गुप्ता जी ने अपने कार्यकाल में जो धार्मिक कार्यों के लिए धन आबंटित करने का प्रदर्शन किया है वह इस प्रकार है-

दिल्ली सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर राजधानी के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना के तहत प्रत्येक जिले को 5 लाख रुपये की राशि आबंटित करने की घोषणा की है। जिसके आधार पर दिल्ली के सभी 13 जिलों में जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होंगे।

भेदभाव पूर्ण रवैया

1. कांवड़ यात्रा के लिए अनुदान और सुविधाएं

सरकार ने कांवड़ यात्रा के प्रबंधन में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली लागू की है।

वित्तीय सहायता: पंजीकृत कांवड़ समितियों को शिविर लगाने के लिए 50,000 से 10 लाख रुपये तक का सीधा अनुदान दिया जा रहा है।

मुफ्त बिजली: प्रत्येक कांवड़ शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की गई है।

एकल खिड़की: शिविरों के लिए सभी आवश्यक मंजूरी अब एक ही जगह से 72 घंटे के भीतर मिल जाती है।

सुविधाएं: सरकार वाटरप्रूफ टेंट, सीसीटीवी सुरक्षा, चिकित्सा केंद्र, पंखे, कूलर और साफ पेयजल सुनिश्चित करती है।

2. गौशालाओं के लिए बजट

गौ-संरक्षण के लिए सरकार ने हाल ही में (मार्च 2026 में) बड़े कदम उठाए। दिल्ली सरकार ने गौशालाओं के बकाया भुगतान और चारे के खर्च के लिए 20.26 करोड़ रुपए जारी किए हैं। इसमें से लगभग 7.64 करोड़ रुपए पुराने बकाया के लिए और 12.62 करोड़ रुपए चारे के खर्च के लिए हैं।

आधुनिक गौशालाएं: पहले चरण में 10 गौशालाओं को आधुनिक गौशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य भविष्य में इसे 40 तक ले जाना है।

पट्टा विस्तार: सुल्तानपुर डबास, रेवला खानपुर, हरेवली और सुरेरा जैसी प्रमुख गौशालाओं के पट्टों का नवीनीकरण कर दिया गया है।

3. मंदिरों और धार्मिक स्थलों का विकास

सरकार ने बुनियादी ढांचे के माध्यम से मंदिरों को सहायता प्रदान की है। आर.के. पुरम जैसे विधानसभा क्षेत्रों में 100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का उद्घाटन किया गया है, जिसमें मंदिरों के आसपास की सड़कों, लाइटों और नागरिक सुविधाओं का सौंदर्यीकरण शामिल है।

प्रति क्षेत्र 10 करोड़: मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए 10 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है, जिसका उपयोग स्थानीय विधायकों द्वारा धार्मिक स्थलों और सामुदायिक केंद्रों के आसपास जन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। उपरोक्त सभी घोषित योजनाएं भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा देंगी जिसमें भाजपा व संघ से जुड़े लोगों को ठेके व अन्य माध्यमों से सरकार का धन अवैधानिक रूप से मुहैया कराया जायेगा। जिसमें अवैध ढंग से पैसे खाने की खिड़की संघी पैरोकारों के लिए खुली रहेगी।

सीएम की मानसिकता में हिन्दुत्व की वैचारिकी

सीएम रेखा गुप्ता जब से दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी है तभी से उनके आचरण से दिखाई देता है कि वे मूल रूप से हिन्दुत्व की वैचारिकी को प्रोत्साहित करके उसको भरपूर सर्मथन दे रहीं है। उपरोक्त विवरण को देखकर लगता है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी ने समाज के अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, सिख, बौद्ध व ईसाई) के लिए कोई नियोजित कार्यक्रम और उसके लिए धन आबंटन का प्रस्ताव भी नहीं दिया है। उनके ऐसे आचरण से लगता है कि वे संविधान विरोधी कार्यों को बढ़ावा दे रहीं है। भारत का संविधान समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता की बात करता है और धार्मिक आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव का निषेध करता है। जो श्रीमती रेखा गुप्ता के व्यवहार और कार्ययोजना से परिलक्षित नहीं होता है। इसी आधार पर श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार को दिल्ली की जनता भेदभाव पूर्ण रवैये वाली सरकार मानती है।

14 अप्रैल दलित समाज के सभी जातीय घटकों के लिए महत्वपूर्ण: बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती पूरे विश्व में 14 को बड़ी धूमधाम व उत्साह के साथ मनाई जाती है। बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के अलावा दुनिया में कोई अन्य महापुरुष नहीं है जिनकी जयंती इतने व्यापक स्तर पर मनाई जाती हो। यह सभी को ज्ञात है कि मनुवादी संघी व ब्राह्मणवाद से संक्रमित मानसिकता वाले लोग बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर का कद छोटा करके दिखाने का प्रयास हमेशा से करते आ रहे हैं। श्रीमती रेखा गुप्ता जी के पूर्व के अपने संघी नेता बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के कल्याणकारी कार्यक्रमों की हमेशा से ही आलोचना करते आ रहे हैं। इसी संदर्भ में देशभर में बाबा साहेब से जुड़े कल्याणकारी कार्यों का विरोध भी करते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर महिलाओं के हक अधिकारों के लिए बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर जब हिन्दू कोड बिल लेकर आए थे तब के संघी और ब्राह्मणवादी नेता व उनके द्वारा पाले गए पाखंडी साधु-संत बाबा साहेब का पुरजोर विरोध कर रहे थे और बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान को नकारकर मनुस्मृति को देश का संविधान कहकर पुकार रहे थे। इसी संदर्भ में बहुजन समाज (एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक) का मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वे अपने सभी सरकारी स्कूल व विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को मनुस्मृति का गहरा अध्ययन कराके देश में जगह-जगह उस पर विचार गोष्ठी करके समाज विशेषकर महिलाओं को यह बताने का प्रयास करे कि मनुस्मृति महिलाओं के लिए उद्धारक है या नरक स्थली। वे खुद एक महिला होने के नाते मनुस्मृति की नरक स्थली को समझ सकती हंै और लोगों को बता सकती है।

आरक्षित वर्ग के साथ भेदभाव: दिल्ली में जब से संघी मानसिकता की सरकारें हैं तभी से दिल्ली में भेदभाव का रवैया खुलकर चलाया जा रहा है। पूर्व में केजरीवाल सरकार और अब उसका अनुसरण करते हुए श्रीमती रेखा गुप्ता दिल्ली के स्कूलों व अन्य संस्थानों में आरक्षित वर्ग के लोगों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। शैक्षणिक संस्थानों में भर्ती न करने के पीछे संघी मानसिकता के आलमबरदारों का छिपा तर्क यह है कि अगर नियमित भर्ती करेंगे तो आरक्षित वर्ग के लोगों को आरक्षण भी देना होगा। इसलिए नियमित भर्ती मत करो, आरक्षण भी नहीं देना पड़ेगा और कम पैसे देकर सरकारी काम भी चलते रहेंगे। साथ ही आरक्षण न देकर आरक्षित वर्ग के लोग आर्थिक रूप से कमजोर भी होंगे जो संघियों की मानसिकता में एक छिपा हुआ तत्व है, वे उसी के अनुसार कार्य करते हैं।

संघी सरकारों का ध्यान सवर्ण समुदायों पर अधिक: दिल्ली सरकार में जितने भी सरकारी ठेके या दूसरे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं उनमें ब्राह्मण-बनियों की संख्या अधिक पाई जाती है जबकि जनसंख्या के हिसाब से उनकी समाज में भागीदारी 3-5 प्रतिशत है। चूंकि श्रीमती रेखा गुप्ता और केजरीवाल इन्हीं समुदायों से संबन्धित है, इसलिए वे इन्हीं समुदायों को हमेशा से समर्थन कर रहे हैं, बहुजन समाज की जनता को उनके इस षड्यंत्र को समझना होगा और इस तरह की मानसिकता वाले लोगों को अपना वोट और किसी भी प्रकार का समर्थन न देने का दृढ़ संकल्प लेना होगा।

उपरोक्त विवरण के अलावा संघी मानसिकता के व्यक्तियों में चाहे वह केजरीवाल हो या श्रीमती रेखा गुप्ता हो उनमें भेदभाव गहराई तक व्याप्त है। यहाँ तक कि अनुसूचित जाति व जनजातियों के लिए बजट में जो आनुपातिक प्रावधान किए जाये हैं वे भी इन दोनों सरकारों ने चुपचाप तरीके से हड़प लिये हंै। जिसे देखकर बहुजन समाज की जागरूक जनता संघी मानसिकता की सरकारों को कभी माफ नहीं करेगी।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

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