




2026-04-18 16:22:31
नई दिल्ली। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की 135वीं जयंती (14 अप्रैल 2026) को भारत सहित दुनिया के कई देशों में बड़े उत्साह के साथ मनाई गयी। अम्बेडकर जयंती अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक अवसर बन गया है जिसे ‘अंतरराष्ट्रीय समानता दिवस’ के रूप में भी जाना जाता है।
दिल्ली के संसद भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (या सी.पी. राधाकृष्णन), और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और अन्य नेताओं ने भी संविधान निर्माता को श्रद्धांजलि दी।
चैत्य भूमि (मुंबई): मुंबई के दादर स्थित चैत्य भूमि पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस, राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर देश भर से आए हजारों अनुयायियों ने सामाजिक न्याय के प्रति बाबासाहेब के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
दीक्षा भूमि (नागपुर): नागपुर की ऐतिहासिक दीक्षा भूमि पर 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ 1956 में डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था। इस अवसर पर देश भर से लाखों अनुयायी उन्हें श्रद्धांजलि देने, बुद्ध वंदना, त्रिशरण और पंचशील का पाठ करने के लिए एकत्र हुए। सुबह के समय डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण, बौद्ध भिक्षुओं द्वारा विशेष पूजा और बुद्ध वंदना की। दीक्षा भूमि पर लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है, जो ‘जय भीम’ के नारों के साथ बाबा साहेब को याद किया। बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में कार्यक्रमों के साथ, शाम को सभाओं और बौद्ध गीतों के माध्यम से बाबा साहेब के विचारों का प्रचार किया। इस अवसर पर पुस्तकों का बड़ा मेला लगाया गया, जहाँ बाबा साहेब के जीवन और विचारों पर आधारित साहित्य की काफी बिक्री की गई।
संयुक्त राज्य अमेरिका, न्यूयॉर्क: कोलंबिया विश्वविद्यालय (जहाँ से बाबासाहेब ने शिक्षा प्राप्त की थी) में विशेष सेमिनार और चर्चा आयोजित की गई। डॉ. बी.आर. अंबेडकर के शिक्षा काल और उनके सामाजिक-आर्थिक योगदान को याद करते हुए विशेष सेमिनार आयोजित किए गए। 1913-1916 के बीच यहाँ अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने वाले अंबेडकर ने अपनी मास्टर और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी।
मैरीलैंड: मैरीलैंड में स्थित बाबासाहेब की सबसे ऊँची प्रतिमा पर प्रवासी भारतीयों और मानवाधिकार कार्यकतार्ओं ने श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।
यूनाइटेड किंगडम
लंदन: लंदन स्थित अम्बेडकर हाउस (वह घर जहाँ बाबासाहेब रहते थे) में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें प्रमुख रूप से अम्बेडकर हाउस और लंदन स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) में भारतीय समुदाय ने बाबासाहेब को याद किया। उत्तर-पश्चिम लंदन के प्रिमरोज हिल स्थित अम्बेडकर हाउस, जहाँ बाबासाहेब 1921-22 में अपने डॉक्टरेट अध्ययन के दौरान रहते थे, वहां विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए। इस ऐतिहासिक घर में, जिसे अब स्मारक और संग्रहालय में बदल दिया गया है, अनुयायियों ने एकत्रित होकर बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थान अंबेडकरवादी आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ भारत और दुनिया भर से लोग उनके जीवन से प्रेरणा लेने आते हैं। अम्बेडकर सोसाइटी ने उनके बौद्धिक योगदान को याद करते हुए अकादमिक कार्यक्रम और चचार्एं आयोजित कीं, जो जाति-विरोधी विमर्श और सामाजिक न्याय पर केंद्रित थीं। साथ ही लंदन में भारतीय उच्चायोग ने भी अम्बेडकर हॉल में पुष्पांजलि और विशेष आयोजन किए, जिसमें फेडरेशन आॅफ अंबेडकरवादी एंड बुद्धिस्ट आॅगेर्नाइजेशन्स यूके के सदस्य और सामुदायिक नेता शामिल हुए।
4. कनाडा
ब्रिटिश कोलंबिया और टोरंटो: कनाडा के कई राज्यों ने आधिकारिक तौर पर 14 अप्रैल को अम्बेडकर समानता दिवस के रूप में मान्यता दी है। यहाँ भारतीय प्रवासियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम और समानता मार्च निकाले।
5. संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र ने बाबासाहेब के सिद्धांतों को याद करते हुए उन्हें ‘समानता का मसीहा’ बताया और दुनिया में जातिवाद व भेदभाव मिटाने के लिए उनके योगदान पर विशेष सत्र आयोजित किया।
संयुक्त राष्ट्र में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के वैश्विक योगदान को मान्यता देते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। भारत के संयुक्त राष्ट्र स्थायी मिशन ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बाबासाहेब की 135वीं जयंती मनाई। इस कार्यक्रम का विषय ‘संयुक्त राष्ट्र के भीतर और उससे परे डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण की कालातीत अपील’ था। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिकों और वैश्विक नेताओं ने बाबासाहेब को समानता, सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और समावेशी विकास के एक प्रमुख वैश्विक प्रतीक के रूप में मान्यता दी गई है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बाबासाहेब ने संवैधानिक नैतिकता पर जो बात की थी, वह आज के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और बहुपक्षवाद के अनुरूप एक ‘अंतरराष्ट्रीय संवैधानिक नैतिकता’ विकसित करने के लिए बेहद प्रासंगिक है। उनके योगदान को इस बात के लिए सराहा गया कि कैसे उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग हाशिए पर पड़े लोगों, महिलाओं और दलितों के सशक्तिकरण के लिए किया। 26 नवंबर 2025 को पेरिस में यूनेस्को मुख्यालय में बाबासाहेब की प्रतिमा का अनावरण किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके विचारों को मिली बहुत बड़ी मान्यता है।
6. अन्य देश
आॅस्ट्रेलिया, जर्मनी और जापान: इन देशों में बसे भारतीय समुदायों और दलित संगठनों ने विचार-गोष्ठियों और दीप प्रज्वलन कार्यक्रमों के जरिए अम्बेडकर जयंती धूमधाम से मनाई।
यूपी में अंबेडकर जयंती के मौके पर हुई हिंसा
अंबेडकर जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के कासगंज, आगरा और लखीमपुर खीरी जिलों में तनाव का माहौल रहा। कासगंज में एक जुलूस के दौरान पत्थरबाजी की घटना के बाद तनाव भड़क उठा, जबकि आगरा में कुछ शरारती तत्वों ने परशुराम चौक पर चढ़कर हंगामा किया। लखीमपुर खीरी में बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, कासगंज में यह घटना सहावर थाना क्षेत्र के चाहका गुनर गांव में हुई, जब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही एक शोभा यात्रा उस इलाके से गुजर रही थी। कुछ लोगों ने कथित तौर पर जुलूस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पत्थरबाजी लगभग एक घंटे तक जारी रही। कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सड़क जाम कर दी, जिससे आसपास के इलाके में यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना के सिलसिले में एक महिला सहित लगभग 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, लखीमपुर खीरी में अंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिश के चलते शाम को मैलानी थाना क्षेत्र के बनकेगंज कस्बे में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। अधिकारियों ने बताया कि जब भीड़ उग्र हो गई और उसने अधिकारियों का सामना किया, तो यह झड़प हिंसा में बदल गई।
वाराणसी में एसीपी का फटा सिर
14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के अवसर पर गांव स्थित भैरव बटुक धाम जाने वाले गेट पर कुछ लोगों ने आंबेडकर का झंडा लगाया था। आरोप है कि बाद में कुछ अराजकतत्वों ने झंडे को फाड़कर जला दिया। इसकी सूचना मिलते ही भीम आर्मी के कार्यकर्ता आक्रोशित हो उठे और विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई, जब हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से माहौल गरमा गया और विवाद बढ़ने लगा। मौके पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इधर, शुक्रवार को फिर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों संगठनों के विवाद में जमकर पत्थरबाजी हुई। जिसमें एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना का सिर फट गया। घटना के बाद घायल एसीपी सारनाथ को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।





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