




2026-05-25 16:32:04
संवाददाता
लखनऊ। भंते सुमित रतन जी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करते हुए बताया कि लखनऊ विधानसभा के पास 50 वर्षों से अधिक समय से डॉक्टर अंबेडकर महासभा भवन मौजूद है। इस स्थान पर भारत के गणमान्य लोग हमेशा आते रहे हैं। जिनमें पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायण जी भी शामिल हैं। उन्होंने अपने हाथों से यहां बोधि वृक्ष लगाया था। यहां पर बाबा साहब का अस्थि कलश रखा हुआ है। वहीं बाबा साहब की एक सुंदर मूर्ति भी लगी हुई है। मैं यह वीडयो इस लिए बना रहा हूं क्योंकि योगी सरकार ने कोर्ट के माध्यम से हमें एक नोटिस दिया है कि डॉ. अंबेडकर महासभा खाली करनी पड़ेगी और अगर आप खाली नहीं करना चाहते हैं तो कम से कम 72,000 रुपये प्रति माह किराया सरकार को दो। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के विशेष आदेश से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का घर भी खाली करा लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के विशेष आदेश से बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा बहन मायावती जी का दिल्ली में घर खाली करा लिया गया था और उस घर में अरुण मिश्रा चीफ जस्टिस को रहने के लिए दे दिया गया था। हालांकि यह उदाहरण यहां पर इसलिए उपयुक्त नहंी है क्योंकि सरकारी सम्पत्ति किसी को अलोट की जाती है उसे खाली कराया जा सकता है। लेकिन डॉ. अम्बेडकर महासभा भवन का मामला लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है चूंकि वहां पर बाबा साहेब का अस्थि कलश रखा हुआ है। ये महासभा भारत के बहुजनों के मान-सम्मान का केंद्र है। इस स्थान से बहुत सारे लोगों की यादें जुड़ी हैं। इसलिए समाज इस सथान को खाली नहीं करना चाहता, लेकिन सरकार बर्बरता पर उतर आई है। बुलडोजर की धमकी दे रही है। तो मैं आप लोगों से जानना चाहता हूं कि यह जो स्थान है जहां बोध वृक्ष लगाया गया है। बाबा साहब की मूर्ति लगी है। धम्म चक्र लगा है। क्या ऐसे स्थान को कुचलना चाहिए? लेकिन मैं चाहता हूं कि यह जगह ऐसी ही बनी रहे खाली ना कराई जाए और अगर योगी सरकार बाबा साहब के आंदोलन से बुद्ध के आंदोलन से प्रभावित है कुछ काम करना चाहती है तो यहीं पर विकास करा दे लेकिन महासभा का स्थान यहीं रहना चाहिए।
क्योंकि पूरे भारत के लोग आकर के यहां बैठते हैं और धम्म और मिशन की चर्चा करते हैं। हालांकि इसकी जो कमेटी है उस कमेटी के कुछ लोग चाहते हैं की यह स्थान बना रहे। वहीं कुछ चाहते हैं इसके बदले का स्थान मिल जाए। ऐसे लोग सरकार की दलाली करके समाज के गद्दार बने रहते हैं और उससे राजनीतिक लाभ उठाने की फिराक में रहते हैं। मैं उनकी इस राय से इत्तेफाक नहीं रखता हूं। मैं बौद्ध भिक्षु हूं। बहुजन आंदोलन का मुख हूं। बहुजन आंदोलन का वाहक हूं। तो मैं अपील करता हूं कि इस स्थान को बचाने के लिए सामाजिक लोगों को, धार्मिक लोगों को, राजनीतिक लोगों को आगे आना चाहिए और इस डॉ. अंबेडकर महासभा को बचाना चाहिए। अगर आप लोग आगे नहीं आए, आपने बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं किया, तो योगी सरकार इस पर बुलडोजर बहुत जल्दी चलाने वाली है। मैं यह सूचना देने के लिए आपके बीच में आया था। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत साधुवाद।
दिल्ली में इस प्रकार का कुकर्म कर चुकी है मोदी-संघी सरकार
भाजपा संघी सरकार का यह रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें बाबा साहेब के विचारों और उनके सम्मान से कितनी नफरत है। अहंकार और तानाशाही में डूबी केंद्र की सरकार ने दिल्ली स्थित पुराने संसद भवन के प्रांगण से 3 जून 2024 की रात के अंधेरे में बाबा साहेब डॉ. अम्बेड़कर जी, राष्ट्रपिता ज्योति राव फुले, छत्रपति शिवाजी महाराज और भगवान बिरसा मुण्डा जी की प्रतिमाओं को सुनियोजित षड़यंत्र के तहत हटा दिया था। इन प्रतिमाओं में से बाबा साहेब की प्रतिमा को संसद परिसर में लगवाने के लिए कई वर्षो तक बहुजन नेता श्री बी.पी. मौर्या जी की कुशल और डायनेमिक लिड़रशिप में जेल भरो आंदोलन चला था। तब जाकर ये प्रतिमा संसद भवन के परिसर में 2 अप्रैल 1967 को स्थापित हो पायी थी। जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किया था। इस प्रतिमा के संसद भवन प्रांगण में लगे रहने का ही प्रतिफल है कि हर वर्ष 14 अप्रैल और 6 दिसम्बर को संसद भवन के दरवाजे आम जन के लिए खोले जाते थे। बाबा साहेब में श्रद्धा और आस्था रखने वाले अम्बेड़करवादियों की लगातार बढ़ती और उमड़ती हुई लाखों की भीड से भयभीत होकर केंद्र सरकार के इशारे पर इस कुकर्म को अंजाम दिया गया था। जिससे देश विदेश मे रहने वाले करोड़ों-करोड़ों अम्बेडकरवादियों की श्रद्धा और भावनाओं को ठेस पहुंची थी और पूरे देश मे जबरदस्त रोष और आक्रोष दिखने को मिला था।
देश के सैंकड़ों अम्बेडकरवादियों ने इस षड्यंत्रकारी संघी सरकार का विरोध किया था। परंतु इस आंदोलन को योजना बद्ध तरीके से चलाने के लिए ‘डॉ. बी.आर अम्बेडकर प्रतिमा पुनर्स्थापना संघर्ष समिति’ का गठन किया गया था। यह आंदोलन मुख्यत: समता सैनिक दल के पूर्व अध्यक्ष उम्मेद सिंह गौतम, मुख्य सचेतक ए.आर. जोशी, के. पी. चौधरी व अन्य कई समर्पित अम्बेडकरवादियों की देखरेख में चलाया गया था। लेकिन बहुजन समाज के गद्दार नेताओं के चरित्र के अनुसार उम्मेद सिंह गौतम, ए.आर. जोशी, के. पी. चौधरी आदि कई आंदोलन के सदस्य छिपे रूप में संघी सरकार के दलालों से पिछले दरवाजे से सौदे-बाजी करने के लिए मिल रहे थे और अंतत: उन्होंने इस पूरे आंदोलन को सफल नहीं होने दिया। समाज के कई लोगों ने और उनके नेताओं ने लोगो को बताया था कि उपरोक्त तीन-चार लोग अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से अपना राजनैतिक लक्ष्य साधने के लिए उन राजनैतिक पार्टियों की गुलामी करके पिछले दरवाजे से घुसने की कोशिश कर रहे हैं। 9 अगस्त 2024 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया था। जिसमें सभी आन्दोलनकारी एक मत से कसमें खा रहे थे कि बाबा साहेब की प्रतिमा वहीं लगेगी इससे कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं चाहे हमारी जानें ही क्यों न चली जाएँ। बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर जी की प्रतिमा वहीं पर सम्मानपूर्वक तरीके से लगा दी जाये अन्यथा पूरा अम्बेडकरवादी समाज आने वाले 14 अक्तूबर 2024 को सामूहिकता के साथ हिन्दू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लेगा। यह हमारा एकमत से संकल्प है और हम इसे अवश्य ही पूरा करेंगे।
उपरोक्त इतिहास को देखकर हमें समझ आता है कि समाज में नकली और गद्दार अम्बेडकरवादी अधिक पैदा हो रहे हैं जिसके कारण बाबा साहेब की प्रतिमायें देश में तोड़ी और तुड़वायी जा रहीं हैं। ऐसी ही मानसिकता के लोग आज संसद में 131 एससी/एसटी समाज से आकर समाज के हिस्से की मलाई चाट रहे हैं और देश में बाबा साहेब अम्बेडकर जैसे महान बहुजन नेताओं का सरेआम अपमान हो रहा है और उनकी देशभर में मूर्तियां तोड़ी जा रहीं हैं और छतिग्रस्त की जा रही है। इस लिए अब अम्बेडकरी समाज को अपने बने बनाये गद्दार किसम के नेताओं पर विश्वास नहीं करना चाहिए, समय बदल चुका है सच्चे और नये अम्बेडकरवादियों की समाज को जरूरत है।





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