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यूपी विधानसभा चुनाव: अकेले लड़ने पर अड़ी ‘बहनजी’

बहुजन समाज की नब्ज पहचानने में असफल रहीं हैं बहनजी
News

2026-02-20 14:01:33

मान्यवर साहेब कांशीराम जी का परिनिर्वाण 9 अक्टूबर 2006 को हुआ, उनके स्वस्थ और सक्रिय रहते हुए बहन मायावती जी ने समाज हित में जो कार्य किए वे सभी बहुत ही सराहनीय और बहुजन समाज की बौद्धिक श्रेष्ठता और क्षमता को दर्शाते है। बहन जी का शासन-प्रशासन उत्तर प्रदेश में बनी अभी तक की सभी सरकारों में तुलनात्मक दृष्टि से उत्तम पाया जाता है। शासन-प्रशासन के मुकाबले में बहन जी का कोई सानी नहीं है जिसके कारण उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतीय समाज का बहुजन समाज अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है। साथ में यह भी कामना करता है कि बहन जी दोबारा से लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बने। मगर आज बहुजन समाज बहन जी के राजनीतिक कौशल को देखकर अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है। बहन जी ने जो 18 फरवरी 2026 को प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मीडिया बंधुओं से जो बातें की और उन्हें एआई से सावधान और सजग रहने की हिदायत भी दी, साथ में उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) 2027 का चुनाव अकेले अपने दम पर ही लडेÞगी, वह किसी भी राजनैतिक दल से गठबंधन नहीं करेगी, उन्होंने इसके संबंध में मीडिया बंधुओं को बताया कि गठबंधन करने से उनकी पार्टी को नुकसान होता है। बहन जी की यह दलील आंशिक रूप से सत्य हो सकती है लेकिन पूरी तरह से यह सत्यता से परे है। मान्यवर साहेब कांशीराम जी ने लोकसभा में खड़े होकर एक सवाल के जवाब में स्पष्ट रूप में बताया था कि ‘‘मैं सिद्धान्तवादी नहीं बल्कि मैं समाज हित को देखते हुए अवसरवादी भी हूँ’’ वर्तमान समय में देश का राजनैतिक परिदृश्य मनुवादी संघी सरकारों ने इतना खराब कर दिया है कि उनपर किसी भी तरह का भरोसा करना आत्म हत्या करने से कम नहीं है। पूरे देश में बहुजन समाज के मतदाताओं में यह संदेश पूर्ण रूप से घर कर चुका है कि बहन जी छिपे ढंग से मनुवादी-ब्राह्मणवादी सरकारों का समर्थन कर रही है, खासतौर पर विधान सभा और संसद में अपना एक भी सदस्य न होने पर भी योगी और मोदी सरकार को समर्थन दे रही है। यह समर्थन ऐसा है कि देश के बहुजन मतदाताओं को बहन जी के वक्तव्यों और प्रेस विज्ञप्ति में छपे बयान बहुजन मतदाताओं के गले से नीचे नहीं उतरते।

वर्तमान समय में भारत की राजनीति किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द न घूमकर, जनता से जुड़े मुद्दों की राजनीति पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर रही है। लंबे समय से बहन जी अपने सच्चे अम्बेडकरवादी नेताओं से कटी हुई दिख रही है। बहन जी प्राय: अपने राजनीतिक दलालों और अंधभक्तों से घिरी हुई दिखती है। समाज के बौद्धिक वर्ग के लिए बहन जी के दरवाजें बंद है, उनके दरवाजे पर केवल अंधभक्तों और राजनीतिक दलालों की भीड़ अक्सर दिखाई देती है। बहन जी को अपने अंदर कोई भ्रम पालकर नहीं रहना चाहिए, बहुजन समाज की अधिकांश जनता बहन जी के व्यवहार और आचरण को देखकर उनसे अब कट चुकी है। चूंकि उनके मतदाताओं के मस्तिष्क में यह संदेश घर कर चुका है कि बहन जी संघी मोदी सरकार के दबाव में चुप रहकर पिछले दरवाजे से मनुवादी संघियों की मदद कर रही है।

बहन जी में अगर बहुजन समाज की राजनीति को आगे बढ़ाने का दम है तो उन्हें अपने इर्द-गिर्द समाज के सच्चे, समर्पित, कर्मठ व निष्पक्ष अम्बेडकरवादियों की एक सशक्त टीम बनाकर समाज के सामने पेश करनी होगी और उन्हें खुद अम्बेडकरवादी मिशन को समाज की जमीन पर उतारने के लिए खुद मैदान में उतरना होगा, साथ ही उन्हें अपने भाई-भतीजों और परिवार के मोह को त्यागना होगा। अगर उन्हें वर्तमान केंद्र की सरकार से ईडी, सीबीआई, इन्कम टैक्स का कोई डर है तो वह उसे त्याग दें चूंकि बहुजन समाज के सच्चे अम्बेडकरवादी आपके लिए अपनी जान की परवाह किए बगैर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तैयार है। बहन जी बहुजन समाज के जागरूक अम्बेडकरवादियों को मूर्ख न समझे, वे सबकुछ देख रहे हैं और वर्तमान समय की राजनीति और बहन जी के वक्तव्यों का भी आंकलन कर रहे हैं। वर्तमान राजनीति के आंकलन से समाज के सामने स्पष्ट दृश्य है कि देश की कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने अकेले दम पर सत्ता में नहीं आ सकती इसलिए बहुजन समाज के राजनेताओं को अम्बेडकरवाद से समझौता न करके समान विचारधारा के आधार पर, किसी राजनीतिक पार्टी या राजनैतिक धड़े से गठबंधन करके सत्ता में आने की संभावना बनती है तो आज का बहुजन समाज का मतदाता उसे बुरा नहीं मानता बल्कि उसे सत्ता पाने का एक जरूरी माध्यम मानता है। सत्ता बल से ही बहुजन समाज के हित में उनके कार्यों को अंजाम दिया जा सकता है। बहन जी के अड़ियल रवैये के कारण आज प्रदेश की विधान सभा, केंद्र की लोक सभा आदि में बीएसपी का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं है। बहन जी इस विषय पर गंभीरता से सोचें, परिवार के मोह को त्यागें, वर्तमान सरकार की छिपे ढंगे से चाटुकारिता न करें, समाज हित में फैसले लें, लेकिन वे सभी फैसले समाज को भी ठीक नजर आने चाहिए, केवल आपकी दृष्टि में ही नहीं। वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर जो बातें चल रही है, बहुजन समाज को इन बातों से कोई लेना देना नहीं है, वह खुद आपके आचरण को देखकर ही समझेगा कि आप समाज के हित में कितनी सुदृढ़ और कारगर काम करने की मानसिकता रखती है। हाथी की तरह मैदान में आकर मस्त चाल से आगे बढ़ो और सत्ता हासिल करो।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

2024-01-13 16:38:05