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रेखा गुप्ता सरकार में दिखावे की ‘बहार’

प्रकाश चंद
News

2026-03-07 14:45:45

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में पिछले एक साल से श्रीमती रेखा गुप्ता (Rekha gupta) की सरकार है। सरकार बनने से पहले BJP सरकार ने जनता से जो झूठे वायदे और जुमलों की बरसात की थी वह आजतक अधर में हैं, उनमें से कोई भी वायदा पूरा नहीं हुआ है। Delhi की अधिकांशत्: जनता आज अपने आपको ठगा सा महसूस कर रही है। संघी मानसिकता की सरकारों का देशभर में प्रचार फूल और काम गुल है। दिल्ली में आज चारों ओर देखने को मिल रहा है कि हर सड़क और गली में खुदाई चल रही है, गड्ढे बढ़ रहे है, चारों तरफ धूल ही धूल उड़ रही है। सुबह एक एजेंसी नाली या सड़क का निर्माण करती है, तो शाम को दूसरी एजेंसी उसे तोड़ देती है, और फिर वह काम कई महीनों तक लटका रहता है। पूरी दिल्ली में आलम यह है कि दिल्ली की आम जनता को सड़कों पर चलना, बाजारों में जाना मुश्किल हो रहा है, चारों और धूल की भरमार है। वाहनों का गड्ढों में गिरकर क्षतिग्रस्त होना अब आम बात हो चली है, इतना ही नहीं गड्ढों में गिरकर लोगों की जाने भी जा रही है। मगर दिल्ली की संघी मानसिकता की रेखा गुप्ता की सरकार अपनी पीठ थपथपाने में कोई शर्म महसूस नहीं कर रही है।

हाल ही में होली से पहले दिल्ली सरकार ने महिलाओं-लड़कियों को चार सौगातें देने की घोषणा की जो पहले से ही दिल्ली में चल रहीं थी बस भाजपा ने उनका नाम बदला है। पहली ‘लखपति बिटिया’ (lakhpati bitiya), दूसरी ‘सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड’ (saheli pink smart card), तीसरी ‘होली-दीपाली पर मुफ्त गैस सिलेंडर’ (holi diwali free cylinder yojana), चौथी ‘मेरी पूंजी-मेरा विकास’ (meri punji mera adhikar) की घोषणा है। इन घोषणाओं के मौके पर सरकार ने देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु (dropadi murmu) जी के द्वारा इन योजनाओं की शुरूआत की। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि स्त्री-पुरुष जीवनरूपी रथ के दो पहिये हैं, सभी को आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है तभी यह देश प्रगति-पथ पर अग्रसर हो सकेगा। सरकार के मुताबिक ये योजनाएँ बेटी के जन्म से लेकर आत्मनिर्भरता के सफर में उसका साथ देंगी। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी ने भी कहा कि ये योजनाएँ गेम चेंजर साबित होंगी।

पहली योजना ‘लखपति बिटिया’: बच्चियों के जन्म लेते ही उनके नाम पर 11 हजार रुपये जमा होंगे। कॉलेज की पढ़ाई तक खाते में पैसा जाएगा। बाद में एक साथ एक लाख रुपए से ज्यादा मिलेगा लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी ने यह नहीं बताया कि कितना ज्यादा मिलेगा? संघी मानसिकता की सरकारों में मुंगेरी लाल के सपने दिखाकर भ्रम पैदा करना उनकी एक खास पहचान है। इस योजना के लिए लाभार्थी की वार्षिक आय 1.20 लाख से कम, और कम से कम 3 साल से अधिक वह व्यक्ति दिल्ली का निवासी होना चाहिए था। अकल के अंधे, मनुवादी अंधभक्तों को सोच विचार करना चाहिए कि 1.20 लाख तक की वार्षिक आमदनी वाले दिल्ली में कितने परिवार होंगे? अगर लाभार्थियों को यह प्रमाण पत्र ईमानदारी और स्पष्टता के साथ प्राप्त किया जाता है तो शायद कुछेक गिनती के लोग ही इस योजना के लाभार्थी बन सकेंगे। आम जनता को यह मालूम होना चाहिए कि दिल्ली के जो व्यक्ति सड़क पर घूमकर भीख भी मांग रहा है वह व्यक्ति भी सालाना 1.20 लाख से भी अधिक की कमाई करता है। इस हालात को देखकर लगता है कि संघी मानसिकता की रेखा गुप्ता सरकार ने यह सिर्फ दिखावे के लिए गरीब लाभार्थियों को लुभाने की नियत से योजनायें शुरू की हैं, लेकिन हमें लगता है कि श्रीमती रेखा गुप्ता की सरकार अपने कुछेक चहितों को इस योजना में अस्पष्टता के साथ लाभ पहुंचाने का दिखावा करेगी और अधिकांशत: जनता को इससे कोई लाभ नहीं होगा। इस योजना में बनियागिरि की गहरी मानसिकता की छाप दिखाई देती है।

राज्य व केंद्र में बैठी संघी सरकारें चुनाव के नजदीक आने पर अधिक सक्रिय होकर, योजनाओं की घोषणाएं करती है। शायद श्रीमती रेखा गुप्ता की ये घोषणाएँ उसी तरह की छलावामयी घोषणाएँ है। चूंकि संभवत: दिल्ली में अगले वर्ष नगर निगम के चुनाव होने है और ये घोषणाएँ शायद उसी को घ्यान में रखकर की गई हैं। चूंकि रेखा गुप्ता की सरकार को बने एक साल का समय बीत चुका है और इस दौरान पिछले वर्ष होली-दशहरा-दिवाली भी आई थी तब ये सभी लुभावनी घोषणाएँ क्यों नहीं की थी? इसलिए अब दिल्ली की जनता को इन घोषणाओं से समझ लेना चाहिए कि संघी सरकार इन दिखावटी घोषणाओं से सिर्फ जनता का वोट लेना चाहती है, उसे असली फायदा नहीं पहुंचाना चाहती। अभी हाल ही में दिल्ली नगर निगम (MCD) की 12 वार्डों में चुनाव हुआ जहां पहले सभी पर बीजेपी का कब्जा था लेकिन अब घोषित चुनाव नतीजे दर्शाते है कि दिल्ली की जनता का भाजपा से मोहभंग होता जा रहा है, चुनाव के परिणाम इसी और संकेत कर रहे हैं। 12 वार्डों में अब भाजपा के पास 7, आम आदमी पार्टी के पास 3, कांग्रेस के पास 1 और एक निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। ये परिणाम तब है जब शासन-प्रशासन और चुनाव आयोग में बैठे अधिकारी और कर्मचारी संघी मानसिकता के रंग में रंगकर मैदान में उतारे गए थे।

सहेली ‘पिंक स्मार्ट कार्ड’: यह कार्ड उन महिलाओं को मिलेगा, जिनके पास दिल्ली का आधार कार्ड है अब इसी कार्ड से दिल्ली में मुफ्त डीटीसी बसों की सुविधा मिलेगी। यह योजना संघी मानसिकता की रेखा गुप्ता की सरकार में ‘भेदभाव व असमानता’ को दर्शाती है। दिल्ली देश की राजधानी है, हर राज्य और प्रदेश से संबन्धित महिला दिल्ली में कभी न कभी जरूर आती है तो उनके साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए था। यह योजना संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 और 51 का उल्लंघन भी करती है। इसलिए यह योजना सिर्फ एक दिखावा है, जोर-जोर से इस योजना का सिर्फ ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जबकि इस योजना से सभी महिलाओं को फायदा नहीं मिल पाएगा, कुछेक को छोड़कर।

यह योजना आम जनता के हित में नहीं है, यह योजना सिर्फ एक दिखावा और छलावा मात्र है।

‘मुफ्त गैस सिलेंडर’: होली के अवसर पर 129 करोड़ रुपए 15.50 लाख खातों में ट्रांसफर किए गए। 15.50 लाख राशन कार्ड धारकों को इससे लाभ मिलेगा, दिल्ली की जनता जानती है कि क्या उनका परिवार सिर्फ एक सिलेंडर में पूरे साल अपना काम चला पाएगा? यह सिर्फ एक दिखावा और छलावा मात्र है। देश की जनता पूछ रही है कि सिलेंडर तो वे खुद भरा लेंगे, उन्हें रोजगार चाहिए, अपर्याप्त मुफ्त की रेबाडियां उन्हें नहीं चाहिए। साथ ही उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे उत्कृष्ट श्रेणी के स्कूल चाहिए, जहां पर वे उत्कृष्ठ श्रेणी की शिक्षा प्राप्त कर सकें, और देश की मुख्यधारा में शामिल हो सके संघी मानसिकता की सरकारें जिसे अपने दिल और मस्तिष्क से करना नहीं चाहती।

संघी मानसिकता की सरकारों में दिखावामयी षड्यंत्र जनता को साफ देखने को मिल रहा है। दिन-प्रतिदिन सभी सरकारी स्कूलों का निजीकरण किया जा रहा है और इन सभी स्कूलों में अध्यापक और कर्मचारियों की भारी कमी है। ऐसे हालात संघी सरकारों द्वारा जान-बूझकर बनाए जा रहे हैं ताकि आम जनता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हो। सभी निजी स्कूल भाजपा संघियों के व्यापारी मित्रों के है जिन्हें संघी सरकारें परोक्ष रूप से जनता को लूटकर फायदा पहुंचाना चाहते हैं।

देशभर में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं: आवश्यक धन विहीनता के कारण आम जनता में गरीबी विकराल रूप लेती जा रही है। जहां-जहां पर डबल या ट्रिपल इंजन की सरकारें हंै, वहाँ-वहाँ पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ अधिक गंभीर है। चूंकि इन प्रदेशों मे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर अस्पतालों व स्वास्थ्य संबंधी कार्यालयों का निजीकरण करके ये सभी संस्थान संघी-व्यापारी मित्रों को सौंप दिये गये है। निजीकरण की व्यवस्था लागू करने के पीछे संघी मानसिकता की सरकारों के दो उद्देश्य है-पहला, अगर निजीकरण कर दिया जाता है तो वहाँ पर आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं करनी पड़ेगी, जिससे आरक्षित वर्ग (एससी-एसटी-ओबीसी) को नुकसान होगा, उन्हें रोजगार से वंचित रहना पड़ेगा जिसकी वजह से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। संघी मानसिकता की सरकारों का आरक्षित वर्ग की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना एक अहम लक्ष्य है, जो आरक्षित वर्ग को रोजगार न देकर ही पूरा किया जा सकेगा। दूसरा उद्देश्य यह है कि संघी मानसिकता वाली सरकारों द्वारा देश में भगवाकरण की नीति को मजबूत किया जा सकेगा और पिछड़ी मानसिकता के लोगों को थोड़ा-बहुत लालच देकर उन्हें गुलाम मानसिकता के तहत अंधभक्त बनाया जा सकेगा। अंधभक्त वे औजार होते हैं जो अपने आप क्रियाशील नहीं रहते, वे अपने आकांओं के इशारे पर अपेक्षा के अनुरूप क्रियाशील होकर काम करते हैं।

‘मेरी पूंजी मेरा अधिकार’: लाड़ली स्कीम के तहत 1.75 लाख लड़कियों के बैंक खातों में पड़ी अनक्लेम धन राशि उनको लौटाई जाएगी। सोमवार को 40,642 लड़कियों को 100 करोड़ रुपए उनके खाते में डाले गए। यह सच हो सकता है कि यह रकम उनके खातों में डाली गई होगी, मगर उससे पहले सरकार जनता को यह बताए कि जो जीरो वैलेंस स्कीम के तहत लाखों खाते खुलवाए गए थे, उन खातों का क्या हुआ? जनता ने भी अपने इन जीरों बैलेंस खाते में समय-समय पर कुछ पैसे डाले थे, मगर अपनी आमदनी के अभाव में वे इन खातों को नियमित रूप से चालू नहीं रख पाये, जिसके कारण हर बैंक में पड़े ऐसे धन को बैंक धीरे-धीरे सर्विस चार्ज के नाम पर काटकर उनके द्वारा जमा किये गये धन को खत्म कर दिया है, जो आम जनता के पास थोड़ा बहुत पैसा था वह भी संघी सरकारों ने मुंगेरीलाल के सपने दिखाकर लूट लिया है।

देश में संघी मित्रों के अखबार यह छापकर देश की जनता को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि खाते में पैसे आते ही महिलाओं के चेहरे खिल उठे, वह यह भी जनता को बताएं कि जिन महिलाओं के खाते जीरो बैलेंस पर खुले और फिर वे महिलाएं अपने खातों को नियमित रूप से चालू नहीं रख पाई तो उन खातों में जमा हुए पैसे बैंक, सर्विस चार्ज के नाम पर पूरी तरह से खा गए, वह डूबा हुआ धन, जो इन महिलाओं के साथ वास्तविक घटनाएँ घटित हुई है तो उनके चेहरे अपने खातों को देखकर कितने दुखी हुए होंगे, ये सभी संघी मानसिकता के अखबार इन खबर को भी छापकर देश की जनता को बताएं। खिले चेहरे तो सिर्फ भाड़े पर लाये गए लोगों के ही होते हैं वास्तविक लोगों के नहीं।

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01 जनवरी : मूलनिवासी शौर्य दिवस (भीमा कोरेगांव-पुणे) (1818)

01 जनवरी : राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले द्वारा प्रथम भारतीय पाठशाला प्रारंभ (1848)

01 जनवरी : बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा ‘द अनटचैबिल्स’ नामक पुस्तक का प्रकाशन (1948)

01 जनवरी : मण्डल आयोग का गठन (1979)

02 जनवरी : गुरु कबीर स्मृति दिवस (1476)

03 जनवरी : राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले जयंती दिवस (1831)

06 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. जयंती (1904)

08 जनवरी : विश्व बौद्ध ध्वज दिवस (1891)

09 जनवरी : प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख जन्म दिवस (1831)

12 जनवरी : राजमाता जिजाऊ जयंती दिवस (1598)

12 जनवरी : बाबू हरदास एल. एन. स्मृति दिवस (1939)

12 जनवरी : उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद ने बाबा साहेब को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की (1953)

12 जनवरी : चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (1972)

13 जनवरी : तिलका मांझी शाहदत दिवस (1785)

14 जनवरी : सर मंगूराम मंगोलिया जन्म दिवस (1886)

15 जनवरी : बहन कुमारी मायावती जयंती दिवस (1956)

18 जनवरी : अब्दुल कय्यूम अंसारी स्मृति दिवस (1973)

18 जनवरी : बाबासाहेब द्वारा राणाडे, गांधी व जिन्ना पर प्रवचन (1943)

23 जनवरी : अहमदाबाद में डॉ. अम्बेडकर ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर सभा को संबोधित किया (1938)

24 जनवरी : राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज द्वारा प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य करने का आदेश (1917)

24 जनवरी : कर्पूरी ठाकुर जयंती दिवस (1924)

26 जनवरी : गणतंत्र दिवस (1950)

27 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर का साउथ बरो कमीशन के सामने साक्षात्कार (1919)

29 जनवरी : महाप्राण जोगेन्द्रनाथ मण्डल जयंती दिवस (1904)

30 जनवरी : सत्यनारायण गोयनका का जन्मदिवस (1924)

31 जनवरी : डॉ. अम्बेडकर द्वारा आंदोलन के मुखपत्र ‘‘मूकनायक’’ का प्रारम्भ (1920)

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