




2026-05-02 14:58:41
कपिल देव
नई दिल्ली। तथागत भगवान गौतम बुद्ध की जयंती (बुद्ध पूर्णिमा) के पावन अवसर पर बहुजन स्वाभिमान संघ द्वारा भव्य और गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक विशाल प्रभात फेरी निकाली गई। ‘बुद्ध विहार’ से निकली भगवान बुद्ध की प्रभात फेरी ने पूरे यमुना विहार में भ्रमण किया। इस अवसर पर संघ के कार्यकतार्ओं और पदाधिकारियों ने भगवान बुद्ध और संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। समाज में प्रेम, भाईचारे और समानता का संदेश देते हुए संघ द्वारा राहगीरों और आम जनमानस के लिए मिष्ठान (लड्डू) और ठंडे पेय जल के वितरण का विशेष प्रबंध किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत यमुना विहार स्थित ‘बुद्ध विहार’ से एक शांतिपूर्ण और भव्य प्रभात फेरी के साथ हुई। हाथों में पंचशील का ध्वज लिए और सफेद वस्त्र धारण किए सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने इस फेरी में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रभात फेरी के दौरान बुद्धम शरणम गच्छामि और त्रिशरण व पंचशील के पाठ से पूरा यमुना विहार धम्ममय हो गया। शांति और अनुशासन के साथ निकाली गई इस फेरी ने स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित विशाल जनसमूह और कार्यकतार्ओं को संबोधित करते हुए बहुजन स्वाभिमान संघ के वरिष्ठ विचारकों और वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के दर्शन की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि, भगवान बुद्ध का धम्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक वैज्ञानिक और तार्किक मार्ग है। 2500 साल पहले ही तथागत ने दुनिया को अंधविश्वास, पाखंड, और जन्म पर आधारित ऊंच-नीच से मुक्त होकर प्रज्ञा’, ‘शील’ और ‘करुणा के रास्ते पर चलने का ऐतिहासिक संदेश दिया था।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बहुजन समाज का वास्तविक उत्थान केवल तभी संभव है जब समाज अंधभक्ति की बेड़ियों को तोड़कर शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को अपनाएगा। बाबासाहेब अंबेडकर ने भी बौद्ध धम्म को इसीलिए अपनाया था ताकि शोषित समाज को मानसिक गुलामी से आजाद कर उनमें स्वाभिमान जगाया जा सके।
संघ के पदाधिकारियों ने समाज के युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे भगवान बुद्ध के अप्प दीपो भव: (अपना प्रकाश स्वयं बनो) के सिद्धांत को अपने दैनिक जीवन में उतारें। शिक्षा के माध्यम से खुद को सशक्त बनाएं और सामाजिक न्याय व समानता पर आधारित एक प्रबुद्ध भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
जल और मिष्ठान वितरण का यह कार्यक्रम सुबह 9 बजे भगवान बुद्ध की प्रभात फेरी से शुरू होकर दोपहर बाद तक निरंतर अनुशासन के साथ चलता रहा। इस आयोजन को सफल बनाने में युवाओं, महिलाओं और स्थानीय निवासियों ने भी बढ़-चढ़कर स्वेच्छा से अपना श्रमदान दिया। कार्यक्रम का समापन विश्व शांति, मैत्री भाव और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण की मंगल कामना के साथ हुआ।





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