




2025-12-20 15:37:10
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने 15 दिसंबर को लोकसभा में नाभकीय ऊर्जा का सतत दोहन एवं उन्नयन विधेयक (शांति), 2025 पेश किया गया। जो परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में आपूर्तिकतार्ओं के लिए भारत के सख्त कानून को खत्म करने के साथ ही निजी कंपनियों को उस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है जो अब तक विशेष सार्वजनिक उद्यमों के लिए आरक्षित था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भारत के परमाणु उद्योग को निजी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी कर रही है। यह नया विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 जो भारत के परमाणु क्षेत्र से संबंधित प्राथमिक कानून है और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 का स्थान लेगा, जिसका अमेरिकी परमाणु आपूर्तिकर्ता लंबे समय से वहां की सरकार के समर्थन से विरोध करते रहे हैं। यह नया कानून-जो अमेरिकी कंपनियों को अरबों डॉलर के रिएक्टरों की बिक्री में सुविधा प्रदान करेगा। ट्रंप प्रशासन के साथ कठिन व्यापार वातार्ओं की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें ट्रंप प्रशासन अमेरिकी निगमों के लिए भारत में अधिक व्यावसायिक अवसरों की मांग कर रहा है। नए विधेयक का एक अन्य प्रमुख प्रावधान यह है कि यह किसी भी सरकारी विभाग, सरकारी कंपनी या संयुक्त उद्यमों सहित किसी भी अन्य कंपनी को परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर का निर्माण, स्वामित्व, संचालन या बंद करने की अनुमति देगा। पूर्व व्यवस्था के तहत केवल न्यूक्लियर पावर कॉपोर्रेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन का अधिकार था। इस विधेयक के पारित होने के बाद निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन या बंद करने, परमाणु ईंधन के निर्माण (जिसमें यूरेनियम-235 का रूपांतरण, शोधन और संवर्धन शामिल है) या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य निर्धारित पदार्थ के उत्पादन, उपयोग, प्रसंस्करण या निपटान के लिए लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे।
अडानी ग्रुप की रुचि और प्लान्स:
अडानी ग्रुप ने नवंबर 2025 में सार्वजनिक रूप से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश की इच्छा जताई थी। ग्रुप के सीईओ जुगेशिंदर सिंह ने कहा कि अगर सरकार पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल बनाए, तो वे बहुत इंटरेस्टेड हैं। अडानी ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स प्रोजेक्ट्स में भी रुचि दिखाई है। एनपीसीआईएल के प्रस्ताव पर अडानी पावर सहित कई कंपनियों ने आवेदन किया। कुछ रिपोर्ट्स में अडानी की योजना 30 जीडब्ल्यू न्यूक्लियर कैपेसिटी डेवलप करने की बताई गई है, जो उनकी थर्मल पावर को रिप्लेस करेगी। गौतम अडानी और उनकी टीम ने फरवरी 2025 में तारापुर न्यूक्लियर साइट का दौरा भी किया था, जो उनकी गंभीरता दिखाता है।
बिल अडानी (और अन्य निजी कंपनियों) के लिए क्यों फायदेमंद
बिल पुराने कानूनों को रिपील करके नया फ्रेमवर्क बनाता है, जिसमें भारतीय निजी कंपनियां (विदेशी कंट्रोल वाली नहीं) न्यूक्लियर प्लांट्स का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और डीकमीशनिंग कर सकती हैं। सप्लायर लायबिलिटी (दुर्घटना में उपकरण सप्लायर की जिम्मेदारी) हटाई गई, जो निवेशकों की पुरानी शिकायत थी-इससे निजी निवेश आसान होगा। अन्य कंपनियां जैसे रिलांयस इंडस्ट्री, टाटा पॉवर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, जिंदल स्टीव व हिंडल्का भी इंटरेस्ट दिखा रही हैं।
विपक्ष का आरोप: लोकसभा डिबेट में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और अन्य ने सवाल उठाया कि क्या यह संयोग है कि अडानी ने नवंबर में इंटरेस्ट दिखाया और दिसंबर में बिल आ गया? बिल राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रहा है, सप्लायर लायबिलिटी हटाने से दुर्घटना का जोखिम जनता पर बढ़ेगा, और यह बड़े कॉरपोरेट्स (खासकर अडानी) को फायदा पहुंचाने वाला है। कुछ सांसदों ने इसे क्रोनी कैपिटलिज्म बताया और खढउ (जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी) में भेजने की मांग की।





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